चीनी मोबाइल ऐप्स को लेकर एक बार फिर खतरे की घंटी बजी है। भारत में कई चीनी ऐप्स पर पहले ही पाबंदी लगाई जा चुकी है, और अब अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने भी इन ऐप्स को लेकर दुनिया भर के यूजर्स को आगाह किया है। एजेंसी ने अपनी ताजा चेतावनी में कहा है कि कई चीनी ऐप्स यूजर्स का बेहद संवेदनशील डेटा सार्वजनिक कर सकती हैं, जिससे न केवल यूजर, बल्कि उनके परिवार और सोशल नेटवर्क की सुरक्षा पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
FBI की इस चेतावनी का सबसे गंभीर पहलू यह है कि चीन में संचालित होने वाली ऐप्स वहां के स्थानीय सुरक्षा नियमों से बंधी होती हैं। इन नियमों के मुताबिक, अगर चीनी सरकार या कोई सरकारी एजेंसी किसी यूजर का डेटा मांगती है, तो ये कंपनियां उसे मना नहीं कर सकतीं। इसका सीधा मतलब यह है कि आपका निजी डेटा कलेक्ट होने के बाद निजी नहीं रह जाता और वह सीधे चीनी सरकार के हाथ लग सकता है। ये ऐप्स यूजर की जानकारी के बिना उनके कॉन्टैक्ट्स, डिवाइस की डिटेल और फोन इस्तेमाल करने के तरीके (यूसेज पैटर्न) पर नजर रखती हैं।
बिना डाउनलोड किए भी चोरी हो सकती है जानकारी
एजेंसी ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि आपकी जानकारी चोरी होने के लिए यह जरूरी नहीं कि आपने खुद वह ऐप डाउनलोड की हो। कई मामलों में देखा गया है कि अगर आपके किसी परिचित या दोस्त ने वह ऐप इंस्टॉल की है, तो उस ऐप के जरिए आपकी एड्रेस बुक, ईमेल और फोन नंबर जैसी जानकारियां भी एक्सेस की जा सकती हैं। कई चीनी ऐप्स में ऐसे छिपे हुए टूल्स होते हैं जो फोन के बैकग्राउंड में चुपचाप काम करते रहते हैं और लगातार डेटा चोरी करते रहते हैं।
सुरक्षित रहने के लिए क्या करें यूजर्स?
FBI ने इंटरनेट और स्मार्टफोन यूजर्स को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि किसी भी ऐप को इंस्टॉल करते समय यह जरूर देखें कि वह आपसे किन चीजों की ‘परमिशन’ मांग रही है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई टॉर्च या कैलकुलेटर ऐप आपके कॉन्टैक्ट्स या गैलरी का एक्सेस मांगती है, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूजर्स को केवल आधिकारिक ऐप स्टोर्स (जैसे गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर) से ही ऐप्स डाउनलोड करनी चाहिए और गैर-जरूरी ऐप्स को तुरंत फोन से हटा देना चाहिए। इसके अलावा, अपने फोन और ऐप्स को समय-समय पर अपडेट करते रहना चाहिए, क्योंकि अपडेट के जरिए कंपनियां सुरक्षा की कमियों (बग्स) को दूर करती हैं, जिससे साइबर हमलों से बचाव होता है।
