माघ गुप्त नवरात्रि 2026: आज से 10 महाविद्याओं की साधना का महापर्व शुरू, जानें शुभ मुहूर्त और नियम

Gupt Navratri 2026: आज यानी सोमवार, 19 जनवरी 2026 से इस महापर्व का शुभारंभ हो रहा है, जो 27 जनवरी 2026 तक चलेगा। सामान्य नवरात्रि में जहाँ देवी के नौ स्वरूपों की सार्वजनिक पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की अत्यंत गोपनीय तरीके से साधना की जाती है।

Magh Gupt Navratri 2026
Magh Gupt Navratri 2026

Gupt Navratri 2026: सनातन परंपरा में माघ मास की गुप्त नवरात्रि को शक्ति की साधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। इस दौरान 10 महाविद्याओं — काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला — की साधना और आराधना का महापर्व आज 19 जनवरी 2026 से प्रारंभ होकर 27 जनवरी 2026 तक चलेगा।

हिंदू मान्यता के अनुसार, इस नवरात्रि में जितनी गोपनीयता बरती जाती है, साधना का फल उतना ही अधिक और शीघ्र प्राप्त होता है। तंत्र-मंत्र की सिद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यह समय सर्वोत्तम माना गया है।

घट स्थापना (कलश स्थापना) के शुभ मुहूर्त

आज प्रतिपदा तिथि पर घट स्थापना के लिए दो श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध हैं:

  • प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 06:43 बजे से 10:24 बजे तक।
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:52 बजे से 12:36 बजे तक (यह मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है)।

गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि

गुप्त नवरात्रि के पहले दिन साधक को अपने घर को साफ-सुथरा करने के बाद तन और मन से पवित्र होकर ईशान कोण में एक चौकी पर देवी की मूर्ति या चित्र स्थापित करना चाहिए। गुप्त नवरात्रि में शरद नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि की तरह ही कलश की स्थापना की जाती है। देवी पूजा और व्रत को प्रारंभ करने के लिए जल आप कलश की स्थापना करें, उसके बाद लाल रंग की चुनरी और लाल फूल अर्पित करें। माता को आसन, वस्त्र आदि अर्पित करने के बाद पुष्प, चंदन, रोली, धूप, दीप आदि से पूजा करें।

कलश स्थापना के समय साधक को दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करना चाहिए। यदि ऐसा न कर पाएं तो माता के किसी मंत्र का श्रद्धा के साथ जप करें। देवी की विधि-विधान से पूजा करने के बाद माता को लौंग और बताशे का भोग लगाएं और गुप्त नवरात्रि में प्रतिदिन शाम को माता के लिए शुद्ध घी का दीया जलाएं तथा मंत्र जप या भजन करें।

माघ गुप्त नवरात्रि की पूजा के नियम

  • नवरात्रि की पूजा में जो नियम देवी पूजा के लिए होते हैं, वही इस गुप्त नवरात्रि में भी लागू होते हैं।
  • साधक को नियम-संयम के साथ पूरे 9 दिनों तक देवी की साधना करनी चाहिए।
  • आहार-विहार में संयम बरतें।
  • प्रतिदिन देवी पूजा में यदि संभव हो तो कवच, स्तोत्र आदि का पाठ करें। यदि पाठ न कर पाएं तो माता का श्रद्धापूर्वक भजन, कीर्तन और जप करें।
  • गुप्त नवरात्रि में तामसिक चीजों का प्रयोग न करें, सिर्फ सात्विक आहार और फल का सेवन करें।
  • हमेशा स्वच्छ वस्त्र धारण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • साधना लाल रंग के उनी आसन पर बैठकर करें।
  • साधना के दौरान क्रोध न करें और पूरे मनोयोग से देवी का ध्यान करें।
  • आचरण और व्यवहार सही रखें और यदि संभव हो तो प्रतिदिन एक कन्या का पूजन करें।
  • 10 महाविद्याओं की विशेष साधना करें, यदि संभव न हो तो 9 देवियों की पूजा भी की जा सकती है।

गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व तंत्र, मंत्र और यंत्र की सिद्धि के लिए विशेष फलदायी है। देवी के 10 स्वरूपों की साधना गुप्त रूप से करने पर साधक को विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है। गुप्त नवरात्रि की साधना सभी कष्टों को दूर करने और कामनाओं की पूर्ति करने वाली मानी जाती है। साधक गुप्त सिद्धियां हासिल करने के लिए विशेष साधना करता है।

गुप्त नवरात्रि का पांचवां दिन अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा बसंत पंचमी के दिन की जाती है। यह पर्व शीत ऋतु के बाद बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है।

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