Dhanteras 2026: धनतेरस 2026 कब है? जानें सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और खरीदारी का समय

धनतेरस 2026 का त्योहार 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:31 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है।

धनतेरस 2026 (Image: ChatGPT)
धनतेरस 2026 (Image: ChatGPT)

Dhanteras 2026: दीपावली के पावन त्योहार का आगाज होते ही धनतेरस की तैयारियां बड़े जोर-शोर से शुरू हो जाती हैं। हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन भगवान धन्वंतरि, धन की देवी माता लक्ष्मी और कोषाध्यक्ष कुबेर देव की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू और अन्य मांगलिक वस्तुओं की खरीदारी करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन शुभ मुहूर्त में की गई खरीदारी से घर में साल भर सुख, समृद्धि और वैभव का वास रहता है।

धनतेरस 2026 की सही तिथि

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 6 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर होगा। वहीं, इस त्रयोदशी तिथि का समापन 7 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर होगा। उदयातिथि और प्रदोष काल व्यापिनी तिथि के मुख्य सिद्धांत के आधार पर वर्ष 2026 में धनतेरस का पावन पर्व 6 नवंबर, दिन शुक्रवार को ही मनाया जाएगा।

पूजा और खरीदारी के शुभ मुहूर्त

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शाम का प्रदोष काल सबसे उत्तम माना जाता है। इस बार पूजा का मुख्य शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट की होगी। इसके अलावा दिन के समय पूजा और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।

धनतेरस पर खरीदारी का महत्व और शुभ वस्तुएं

धनतेरस के दिन नई वस्तुओं की खरीदारी की एक प्राचीन और समृद्ध परंपरा है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन सोना, चांदी, नए बर्तन, वाहन, भूमि-भवन और झाड़ू खरीदना अत्यंत फलदायी होता है। इसके अलावा साबुत धनिया, नए वस्त्र, अन्न और पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री खरीदना भी घर में बरकत लाता है। श्रद्धालु अपनी आवश्यकता और वित्तीय क्षमता के अनुसार इन वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं।

क्यों की जाती है भगवान धन्वंतरि की पूजा

पौराणिक कथाओं के अनुसार देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का जनक और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसी कारण धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। इस दिन उनकी विधिवत पूजा करके लोग निरोगी काया, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।

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