Dasha Mata Vrat 2026: दशा माता का व्रत कब है? जानिए सही तिथि, मुहूर्त और धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को बहुत पवित्र माना जाता है। यह दिन दशा माता व्रत के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन दशा माता की पूजा करने से जीवन के कष्ट, दुख और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।

Dasha Mata Vrat 2026 (Image: Gemini)
Dasha Mata Vrat 2026 (Image: Gemini)

Dasha Mata Vrat 2026: सनातन परंपरा में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को बहुत पवित्र माना जाता है। यह दिन दशा माता व्रत के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन दशा माता की पूजा करने से जीवन के कष्ट, दुख और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। खासतौर पर सुहागिन महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं।

दशा माता व्रत 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण दशमी तिथि 13 मार्च 2026 को सुबह 06:28 बजे शुरू होगी और पूरी रात प्रभावी रहेगी। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार व्रत और पूजन शुक्रवार, 13 मार्च को ही संपन्न किया जाएगा। इस दिन पूजा के लिए विशेष रूप से दो शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। पहला अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 बजे से 12:55 बजे तक रहेगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 02:30 बजे से 03:18 बजे तक रहेगा। इन मुहूर्तों में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

दशा माता पूजन की विधि

दशा माता की पूजा करने के लिए महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद कच्चे सूत से बना दस तार वाला धागा लिया जाता है, जिसे हल्दी से रंगा जाता है और उसमें दस गांठें लगाई जाती हैं। इसके बाद महिलाएं पीपल के पेड़ के तने के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए दस बार परिक्रमा करती हैं। यह परिक्रमा करते समय दशा माता से सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।

पूजा के बाद दस गांठ वाला वही पवित्र धागा गले में धारण किया जाता है। कई लोग इस धागे को अगले दिन उतारकर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देते हैं, जबकि कुछ लोग इसे पूरे वर्ष तक पहनकर रखते हैं और अगले वर्ष जल में विसर्जित करते हैं। इसके बाद दशा माता व्रत की कथा सुनी या सुनाई जाती है। परंपरा के अनुसार पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करना विशेष रूप से पुण्यदायी माना जाता है।

पूजा समाप्त होने के बाद सुहागिन महिलाएं अपने घर के मुख्य द्वार पर हल्दी और रोली से शुभ चिह्न या छापे लगाती हैं और परिवार के सुख-सौभाग्य की कामना करती हैं।

व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशा माता का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन की प्रतिकूल स्थितियां अनुकूल होने लगती हैं। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह ‘दशा’ सुधारने वाली माता हैं। इस व्रत के प्रभाव से परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है और साल भर धन-धान्य की कमी नहीं रहती। यह व्रत न केवल सुख-सौभाग्य प्रदान करता है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और आपसी सामंजस्य भी बढ़ाता है। मान्यता है कि पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर की गई यह पूजा साधक को हर संकट से उबार लेती है।

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