Chaitra Masik Janmashtami 2026: हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र माह का प्रारंभ हो चुका है और यह पवित्र महीना शक्ति की उपासना के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक व्रतों के लिए भी जाना जाता है। इसी कड़ी में भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत इस बार बेहद खास होने वाला है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली यह जन्माष्टमी भक्तों को कान्हा की भक्ति में सराबोर होने का अवसर प्रदान करती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि के साथ-साथ मानसिक शांति का वास होता है।
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च 2026 को रात 01:55 बजे से होगी और इसका समापन 12 मार्च 2026 को सुबह 04:18 बजे होगा। चूंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए निशिता काल की पूजा को ध्यान में रखते हुए इस बार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 11 मार्च, दिन बुधवार को मनाई जाएगी। भक्त इस दिन व्रत रखकर कान्हा के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का अभिषेक करेंगे।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का शुभ योग
इस बार की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत फलदायी मानी जा रही है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन दुर्लभ सिद्धि योग और शिववास योग का एक साथ संयोग बन रहा है। सिद्धि योग सुबह 09:12 बजे से शुरू होगा, जो किसी भी नए कार्य की सफलता के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। वहीं, शिववास योग का प्रभाव पूरी रात बना रहेगा। इन शुभ योगों के बीच भगवान कृष्ण और राधा रानी की पूजा-अर्चना करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है और उसे कष्टों से मुक्ति मिलती है।
शुभ मुहूर्त
पूजा के लिए दिन भर में कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। आध्यात्मिक साधना के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 58 मिनट से 5 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। वहीं, अमृत काल का समय दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से 1 बजकर 55 मिनट तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 17 मिनट तक रहेगा, जबकि शाम को गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 49 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर करें मंत्र जाप
इस दिन भक्त निम्नलिखित मंत्रों का जाप कर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना कर सकते हैं:
- ॐ कृष्णाय नमः
- हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।
- ॐ श्री कृष्णः शरणं ममः
- ॐ देव्किनन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
- ॐ नमो भगवते तस्मै कृष्णाया कुण्ठमेधसे। सर्वव्याधि विनाशाय प्रभो माममृतं कृधि।।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का यह पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने पर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
