चुनाव आयोग की ‘एसआईआर’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर एक नई राष्ट्रीय बहस छिड़ गई है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता सूचियों में नए वोटरों के पंजीकरण, नाम हटाने और उन्हें बहाल करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुनाव आयोग के भीतर ही सहमति नहीं थी। तीन सदस्यीय चुनाव आयोग पैनल—जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी शामिल हैं—में से दोनों चुनाव आयुक्तों (संधू और जोशी) ने बीते 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार विभिन्न निर्देशों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस खुलासे का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने लिखा कि चुनाव आयोग के विभिन्न निर्देशों पर तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने विरोध जताया था, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। प्रशांत भूषण का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के कारण 13 करोड़ से अधिक नागरिक अपने मताधिकार से वंचित हो गए हैं और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस गंभीर मामले पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है।
Astounding story on the front Page of the Express! 2/3 ECIs objected to Gyanesh Kumar’s moves on various directives of ECI regarding SIR. But govt’s hatchet man Gyanesh Kumar illegally kept issuing directives which has resulted in disenfranchising >13 Cr voters so far! SC must take this up suo moto!
— Prashant Bhushan (@pbhushan1) September 23, 2026
प्रशांत भूषण ने अपने दूसरे बयान में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए बाकी दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को अनुचित तरीके से नजरअंदाज किया, जो एक बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत पद से हटाने और उन पर उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग उठाई है।
गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विवाद लंबे समय से जारी है। बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व जब यह प्रक्रिया शुरू की गई थी, तब से ही विभिन्न विपक्षी दल चुनाव आयोग की भूमिका और निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय भी इस मुद्दे पर काफी विवाद देखने को मिला था और वर्तमान में दिल्ली में जारी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बहस गर्म है। इस बीच, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई, जहाँ अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में जारी किए गए नोटिस प्रथम दृष्टया एक ही ढर्रे पर या किसी मशीन द्वारा जारी किए गए प्रतीत होते हैं।
