झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 12वें दिन भी जारी है। JPSC और JSSC समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र धरने पर बैठे हैं। आंदोलन के दौरान चार छात्र आमरण अनशन पर हैं और प्रदर्शनकारी लगातार निष्पक्ष जांच तथा कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन के दौरान छात्रों से जब यह सवाल पूछा गया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अन्य राज्यों में छात्रों के मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं, लेकिन रांची के आंदोलन पर अब तक कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई, तो एक छात्र ने जवाब दिया, “हबीबी कम टू रांची।” छात्र ने कहा कि अगर राहुल गांधी देशभर के छात्रों की आवाज उठाते हैं, तो उन्हें रांची आकर यहां के छात्रों की समस्याएं भी सुननी चाहिए। उनका कहना था कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं, बल्कि निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए है।
छात्र द्वारा इस्तेमाल किया गया “हबीबी” शब्द अरबी भाषा का है, जिसका अर्थ “मेरे प्रिय”, “मेरे दोस्त” या “मेरे प्यारे” होता है। सोशल मीडिया पर भी यह शब्द अपनापन जताने के लिए काफी प्रचलित है। छात्र ने इसी शब्द के जरिए राहुल गांधी से रांची आने और आंदोलनरत छात्रों से मिलने की अपील की।
इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और जो भी अपनी मांग रखना चाहता है, वह सरकार से संवाद कर सकता है। मुख्यमंत्री के मुताबिक मामले की जांच जारी है, कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वह केंद्रीय गृह मंत्री से भी इस मुद्दे पर बात करेंगे।
छात्रों का कहना है कि विवाद की शुरुआत 14वीं झारखंड सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा (JPSC) के परिणाम से हुई। उनका आरोप है कि कट-ऑफ तय करने में गंभीर अनियमितताएं हुईं, मेरिट सूची पर जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं थे और OMR शीट में भी गड़बड़ी की आशंका है। प्रदर्शनकारी यह भी आरोप लगा रहे हैं कि परीक्षा आयोजित करने का जिम्मा जिस कंपनी TDPL को दिया गया, उसे राज्य सरकार पहले ही ब्लैकलिस्ट कर चुकी थी, फिर भी उसे परीक्षा संचालन का काम सौंपा गया।
इन्हीं आरोपों को लेकर छात्र निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
