“प्रधानमंत्री मोदी ने एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी सम्मेलन का उद्घाटन किया, कृषि क्षेत्र को समर्पित विकास की नई राह पर जोर”

प्रधानमंत्री ने भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब ‘फूड सेक्योरिटी’ से ‘न्यूट्रीशनल सेक्योरिटी’ पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

PM Modi Inaugurates M.S. Swaminathan Centenary Conference
PM Modi Inaugurates M.S. Swaminathan Centenary Conference

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान वैज्ञानिक और ‘हरित क्रांति’ के जनक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को उनकी जन्मशती के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन ने विज्ञान को जनसेवा का माध्यम बनाया और देश की खाद्य सुरक्षा को अपने जीवन का ध्येय बना लिया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर नेशनल हैंडलूम डे की भी बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने डॉ. स्वामीनाथन के साथ अपने पुराने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो सॉइल हेल्थ कार्ड योजना पर काम शुरू किया था, जिसमें स्वामीनाथन ने बहुत रुचि ली और मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन मानते थे कि “science is not just about discovery, but delivery”, यानी विज्ञान सिर्फ खोज के बारे में नहीं, बल्कि उसे लोगों तक पहुँचाने के बारे में भी है।

उन्होंने बताया कि स्वामीनाथन ने न केवल ग्रेन प्रोडक्शन बढ़ाने का प्रयास किया, बल्कि खेती में केमिकल के बढ़ते प्रयोग और मोनोकल्चर फार्मिंग के खतरों के प्रति भी किसानों को जागरूक किया। इसके लिए उन्होंने ‘एवरग्रीन रेवोल्यूशन’ और ‘बायो-विलेज’ जैसे विचार दिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामीनाथन ने मिलेट्स (श्री-अन्न) पर उस समय काम किया, जब कोई उनकी बात नहीं करता था। उन्होंने जलवायु के अनुकूल फसलों को विकसित करने की भी वकालत की। उन्होंने बायोडायवर्सिटी से एक कदम आगे बढ़कर ‘बायोहैप्पीनेस’ का विचार दिया, जिसका उद्देश्य स्थानीय संसाधनों के उपयोग से लोगों की आजीविका में बदलाव लाना था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत दूध, दाल और जूट के उत्पादन में नंबर वन है, जबकि चावल, गेहूं, कपास, फल और सब्ज़ियों के उत्पादन में दूसरे नंबर पर है। उन्होंने कहा कि भारत अपने किसानों के हितों के साथ कभी भी समझौता नहीं करेगा और सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खर्च कम करने और आय के नए स्रोत बनाने पर लगातार काम कर रही है।

प्रधानमंत्री ने भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब ‘फूड सेक्योरिटी’ से ‘न्यूट्रीशनल सेक्योरिटी’ पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों से बायो-फोर्टिफाइड और न्यूट्रीशन से भरपूर फसलों को विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही, केमिकल का उपयोग कम करने और नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दिया।

उन्होंने क्लाइमेट-रेसिलिएंट फसलों को विकसित करने, सोलर-पावर्ड माइक्रो-इरिगेशन को बढ़ावा देने और सैटेलाइट डेटा, एआई, और मशीन लर्निंग का उपयोग करके कृषि में निर्णय लेने में सहायता करने वाले सिस्टम विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने एग्री-टेक स्टार्टअप्स को भी अनुभवी वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लेने की सलाह दी।

प्रधानमंत्री ने ‘एम.एस. स्वामीनाथन अवॉर्ड फॉर फूड एंड पीस’ की शुरुआत पर खुशी जताई और यह पहला अवार्ड पाने वाले नाइजीरिया के वैज्ञानिक प्रोफेसर आडेनले को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह अवार्ड उन लोगों को दिया जाएगा जिन्होंने फूड सिक्योरिटी की दिशा में बड़ा काम किया है।

अंत में, प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. स्वामीनाथन की प्रेरणा से देश के वैज्ञानिक छोटे किसानों के हितों को सर्वोपरि रखकर और खेतों में काम करने वाली महिलाओं को सशक्त करके आगे बढ़ें।

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