हरदा, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के हरदा जिले में छह साल की एक मासूम बच्ची से दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लेकिन इस घटना के बाद मेडिकल परीक्षण को लेकर सरकारी तंत्र की असंवेदनशीलता भी उजागर हुई है। सिराली के सरकारी अस्पताल से बच्ची को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, जहां पिता पीड़ित बच्ची को गोद में लेकर परिजनों के साथ लगभग पांच घंटे तक इधर-उधर भटकते रहे, क्योंकि डॉ. मीनाक्षी पटेल ने उसका परीक्षण करने से इनकार कर दिया।
सिराली थाना प्रभारी संदीप यादव ने तत्काल इसकी जानकारी कलेक्टर सिद्धार्थ जैन और एसपी अभिनव चौकसे को दी। इसके बाद सीएमएचओ डॉ. एचपी सिंह को अपनी जनसुनवाई छोड़कर जिला अस्पताल पहुंचना पड़ा। आखिरकार, पांच घंटे के इंतजार के बाद डॉ. मेघा बांके ने पीड़ित बच्ची का मेडिकल परीक्षण किया।
सिराली थाना प्रभारी संदीप यादव ने बताया कि आरोपी मनीराम, जिसका जिलाबदर खत्म हुआ था, 9 जून को ही गांव आया था। गांव के एक घर में टीवी देखने जा रही 6 साल की बच्ची को आरोपी मनीराम 5 रुपये का लालच देकर गांव से बाहर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। देर शाम तक बच्ची जब खाना खाने नहीं लौटी तो परिजनों ने उसे ढूंढना शुरू किया। बच्ची के मिलने पर उसने अपने साथ हुई आपबीती बताई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मनीराम को गिरफ्तार कर लिया है।
इस पूरे मामले में मेडिकल परीक्षण में देरी और कथित इनकार को लेकर हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि महिला डॉक्टर मीनाक्षी पटेल के सस्पेंशन और जांच के लिए कमिश्नर को पत्र लिखा जा रहा है। वहीं, डॉ. मीनाक्षी पटेल ने अपने बचाव में कहा है कि उन पर लगाई गई शिकायत झूठी है। कलेक्टर ने पूरे मामले को लेकर विस्तृत जांच के निर्देश भी जारी किए हैं।
