उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की पहली बैठक: सभी दलों से सहयोग की अपील, कहा– ‘संसद में संवाद को मिले प्राथमिकता’

भारत के नए उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि “सांसदों को बोलने का अधिकार है, लेकिन हमें ‘लक्ष्मण रेखा’ पार नहीं करनी चाहिए। बगैर मतभेदों के लोकतंत्र नहीं हो सकता।”

VP C.P. Radhakrishnan Urges All Parties to Prioritize Discussion in Parliament in First Meeting
VP C.P. Radhakrishnan Urges All Parties to Prioritize Discussion in Parliament in First Meeting

नई दिल्ली: भारत के नए उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को संसद के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से अपनी पहली औपचारिक मुलाकात की। इस बैठक में उन्होंने सभी दलों से सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। राधाकृष्णन ने जोर देकर कहा कि संसदीय परंपराओं और मर्यादाओं का पालन करते हुए ही बहस होनी चाहिए और किसी को भी ‘लक्ष्मण रेखा’ पार नहीं करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सदन जनप्रतिनिधियों की गरिमा और लोकतंत्र के आदर्शों का प्रतीक है, इसलिए व्यवधान के बजाय संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सभापति राधाकृष्णन ने कहा कि “सांसदों को बोलने का अधिकार है, लेकिन हमें ‘लक्ष्मण रेखा’ पार नहीं करनी चाहिए। बगैर मतभेदों के लोकतंत्र नहीं हो सकता।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संसद में चर्चा और असहमति लोकतंत्र की आत्मा हैं, लेकिन मर्यादा और अनुशासन की सीमाओं का पालन जरूरी है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग दें ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक बहस हो सके।

इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री और उच्च सदन के नेता जे.पी. नड्डा, कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन शामिल हुए। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री और जद(एस) नेता एच.डी. देवेगौड़ा तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे अस्वस्थता के कारण उपस्थित नहीं हो सके।

बैठक के दौरान, कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने मांग की कि विपक्ष द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक ध्यानाकर्षण और एक अल्पकालिक चर्चा की अनुमति दी जाए। सूत्रों के अनुसार, रमेश ने राधाकृष्णन से उन मुद्दों पर भी चर्चा की अनुमति देने का आग्रह किया, जिन पर हाल के वर्षों में चर्चा नहीं हो सकी है, विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन से संबंधित विषयों पर। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सभी विधेयकों को स्थायी समितियों में भेजा जाना चाहिए।

उच्च सदन में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि उपराष्ट्रपति ने एक औपचारिक परिचय बैठक आयोजित कर एक अच्छी परंपरा शुरू की है, जहाँ उन्होंने सभी की बात सुनी। उन्होंने कहा, “यह निर्णय लिया गया कि संसद में कामकाज सुचारू रूप से हो।

विपक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा चाहता है और हमें बोलने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने (सभापति) आश्वासन दिया कि वे सभी सुझावों पर ध्यान देंगे।” द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा ने भी कहा कि राधाकृष्णन ने यह आश्वासन दिया कि वे राज्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की अनुमति देंगे। वहीं, माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने मांग की कि सरकार को विपक्ष को अपने मुद्दे उठाने की अनुमति देनी चाहिए और बड़ी संख्या में प्रश्नों के अस्वीकार किए जाने का मुद्दा भी उठाया। शिवसेना नेता मिलिंद देवरा ने उपराष्ट्रपति को अपनी पार्टी के पूर्ण समर्थन और संसदीय आचरण के उच्चतम मानकों का आश्वासन दिया।

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