कौन हैं अब्दुल अल-सैयद? मिशिगन से अमेरिकी सीनेट पहुंचे, ट्रंप के निशाने पर रहे डेमोक्रेट नेता

अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनाव में मिशिगन की सीनेट सीट पर डेमोक्रेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने जीत दर्ज की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराया। डॉक्टर और महामारी विशेषज्ञ के रूप में पहचान बनाने वाले अब्दुल का जन्म मिशिगन के डेट्रॉयट में हुआ था।

ट्रंप के हमलों के बावजूद मिशिगन सीनेट सीट पर अब्दुल अल-सैयद आगे
ट्रंप के हमलों के बावजूद मिशिगन सीनेट सीट पर अब्दुल अल-सैयद आगे

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में मिशिगन की सीनेट सीट पर डेमोक्रेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद चर्चा में हैं। चुनावी रुझानों के मुताबिक, वह अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स से आगे चल रहे हैं। दूसरी ओर, प्रतिनिधि सभा और सीनेट में भी डेमोक्रेट पार्टी को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। इस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुस्लिम अप्रवासियों को लेकर कई बयान दिए और अब्दुल अल-सैयद को भी लगातार निशाने पर रखा। हालांकि, शुरुआती नतीजों में इसका असर उनकी बढ़त पर पड़ता नहीं दिख रहा है।

मिशिगन से आए चुनावी आंकड़ों के अनुसार, अब्दुल अल-सैयद को करीब 20 लाख वोट मिले हैं। उन्हें 51.83 फीसदी मत हासिल हुए हैं और वह माइक रोजर्स से आगे हैं। इस सीट पर मुकाबला काफी चर्चा में रहा, क्योंकि ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान अब्दुल को निशाना बनाया था। उन्होंने फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे यूरोपीय देशों में हिंसा का उदाहरण देते हुए मुस्लिम अप्रवासियों के खिलाफ बयान दिए थे।

कौन हैं अब्दुल अल-सैयद?

अब्दुल अल-सैयद मिशिगन से डेमोक्रेट पार्टी के सीनेट उम्मीदवार हैं। पेशे से डॉक्टर और महामारी विशेषज्ञ अब्दुल का जन्म मिशिगन के डेट्रॉयट शहर में हुआ था। उनके माता-पिता मिस्र से अमेरिका आए थे।

अब्दुल ने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। वह डॉक्टर होने के साथ कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी रह चुके हैं।

अमेरिकी राजनीति में बढ़ती नफरत और नस्लीय भेदभाव को देखते हुए उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उनका मानना है कि आम लोगों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक व्यवस्था में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

लाखों लोगों का मेडिकल कर्ज कराया माफ

अब्दुल अल-सैयद के पास मिशिगन की सबसे बड़ी काउंटी वेन के स्वास्थ्य विभाग के निदेशक के रूप में काम करने का प्रशासनिक अनुभव है। इस दौरान उन्होंने गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए कई कदम उठाए।

दिए गए विवरण के मुताबिक, उन्होंने वेन काउंटी के एक लाख से अधिक गरीब लोगों का करीब 800 करोड़ रुपये का मेडिकल बिल माफ कराया। इसके अलावा, कम आय वाले परिवारों के स्कूली बच्चों को मुफ्त चश्मे उपलब्ध कराए गए। प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए पूरे काउंटी में एयर क्वालिटी मॉनिटर भी लगवाए गए।

क्या हैं अब्दुल अल-सैयद के चुनावी वादे?

अब्दुल अल-सैयद ने अपने चुनाव प्रचार में आम लोगों की आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं और राजनीति में कॉरपोरेट कंपनियों के प्रभाव को प्रमुख मुद्दा बनाया है।

कॉरपोरेट चुनावी चंदे पर रोक: अब्दुल ने राजनीति में कॉरपोरेट फंडिंग खत्म करने का वादा किया है। उनका मानना है कि बड़ी कंपनियों के पैसे का चुनावी व्यवस्था पर बढ़ता प्रभाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है। वह चुनावी चंदे में कॉरपोरेट कंपनियों की भूमिका सीमित करना चाहते हैं।

महंगाई से राहत: उन्होंने दवाइयों, घरों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को कम करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में कंपनियों की मुनाफाखोरी पर रोक लगाने के लिए कड़े कानून बनाए जाने चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

सभी को स्वास्थ्य सुविधा: अब्दुल अल-सैयद मेडिकेयर फॉर ऑल के समर्थक हैं। उन्होंने इस विषय पर एक किताब भी लिखी है। उनकी योजना के मुताबिक, अमेरिका के हर नागरिक को अच्छी स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होनी चाहिए और इलाज के लिए आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

जनता के बीच कैसे बनी अब्दुल की पहचान?

मिशिगन की सीनेट सीट पर अब्दुल अल-सैयद का मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से था। डेमोक्रेट पार्टी के अंदर हुए मुकाबले में उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी हेली स्टीवंस को हराकर पार्टी का उम्मीदवार बनने का रास्ता साफ किया था।

उनके समर्थन में डेमोक्रेट पार्टी के समर्थकों ने महज 24 घंटे में चुनाव प्रचार के लिए करीब 20 करोड़ रुपये का चंदा जुटाया था। बाद में हेली स्टीवंस निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं, लेकिन आखिरी समय में उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का समर्थन कर दिया।

इसके बावजूद शुरुआती चुनावी रुझानों में अब्दुल अल-सैयद अपने प्रतिद्वंद्वी से आगे दिखाई दे रहे हैं। उनकी उम्मीदवारी और चुनाव प्रचार ने मिशिगन की इस सीनेट सीट को मध्यावधि चुनाव के सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल कर दिया है।

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