अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को कई अहम सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने टेक्सास, ओहायो, दक्षिण कैरोलिना, जॉर्जिया और नॉर्थ कैरोलिना में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है। सबसे ज्यादा चर्चा टेक्सास की है, जहां लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहा है। यहां डेमोक्रेट उम्मीदवार जेम्स टालारिको ने रिपब्लिकन केन पैक्सटन को हराकर करीब 33 साल बाद सीनेट सीट पर पार्टी की वापसी कराई है।
इस चुनाव में ट्रंप के करीबी माने जाने वाले दो अन्य उम्मीदवारों को भी हार मिली। भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर चुनाव में डेमोक्रेट एमी एक्टन से हार गए। वहीं, दक्षिण कैरोलिना की सीनेट सीट पर ट्रंप समर्थित डार्लिन ग्राहम को डेमोक्रेट एनी एंड्रयूज ने शिकस्त दी। इन नतीजों के बाद रिपब्लिकन पार्टी के लिए संसद में अपना बहुमत बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।
टेक्सास में 33 साल बाद डेमोक्रेट्स की वापसी
टेक्सास को रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। राष्ट्रपति चुनाव में भी डोनाल्ड ट्रंप को यहां बड़ी बढ़त मिली थी, लेकिन मिडटर्म चुनाव में नतीजे अलग रहे। डेमोक्रेट उम्मीदवार जेम्स टालारिको ने रिपब्लिकन केन पैक्सटन को हराकर सीनेट सीट पर जीत दर्ज की।
37 साल के टालारिको राज्य के विधायक रह चुके हैं और पहले मिडिल स्कूल में शिक्षक थे। उन्होंने प्रेस्बिटेरियन धर्मशास्त्र की पढ़ाई भी की है। उनकी जीत इसलिए खास है क्योंकि टेक्सास से आखिरी बार 1993 में डेमोक्रेट पार्टी का कोई नेता सीनेटर चुना गया था। करीब 33 साल बाद पार्टी ने इस सीट पर फिर कब्जा जमाया है। टालारिको सीनेट के सबसे युवा सदस्यों में भी शामिल होंगे। वह लंबे समय से सीनेटर रहे जॉन कॉर्निन की जगह लेंगे।
चुनाव के दौरान केन पैक्सटन की छवि भी चर्चा में रही। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच हुई थी, हालांकि इस मामले में उन पर आरोप तय नहीं हुए। इसके अलावा, टेक्सास विधानसभा में उन पर अपने पद का गलत इस्तेमाल करके एक राजनीतिक मददगार को फायदा पहुंचाने के आरोप लगे थे। बाद में राज्य की सीनेट ने उन्हें इन आरोपों से बरी कर दिया था।
ट्रंप का समर्थन भी पैक्सटन को नहीं दिला सका जीत
रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं को पहले से आशंका थी कि पैक्सटन की छवि चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने पार्टी के अंदर जॉन कॉर्निन के बजाय पैक्सटन का समर्थन किया था। हालांकि, चुनावी नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए।
दूसरी ओर, जेम्स टालारिको ने अपने प्रचार में आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी। उन्होंने अरबपतियों के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाए और कहा कि अमीर लोगों का बढ़ता दखल आम अमेरिकियों के हितों को प्रभावित कर रहा है। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो भी काफी लोकप्रिय हुए। इससे उन्हें रिपब्लिकन और निर्दलीय मतदाताओं का समर्थन हासिल करने में मदद मिली।
विवेक रामास्वामी और डार्लिन ग्राहम को भी हार
ओहायो के गवर्नर चुनाव में भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी को डेमोक्रेट उम्मीदवार एमी एक्टन ने हरा दिया। रामास्वामी को ट्रंप का करीबी और पसंदीदा उम्मीदवार माना जाता था। यह चुनाव उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के गृह राज्य में हुआ। यहां रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी चुनाव को लेकर मतभेद सामने आए थे।
दक्षिण कैरोलिना की सीनेट सीट पर भी डेमोक्रेट उम्मीदवार एनी एंड्रयूज ने ट्रंप समर्थित डार्लिन ग्राहम को हराया। डार्लिन, दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम की बहन हैं। इस नतीजे के साथ डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन पार्टी से एक और अहम सीट छीन ली।
जॉर्जिया और नॉर्थ कैरोलिना में भी डेमोक्रेट्स को जीत
जॉर्जिया में डेमोक्रेट पार्टी को बड़ी कामयाबी मिली। कीशा लांस बॉटम्स राज्य की पहली अश्वेत महिला गवर्नर चुनी गईं। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार रिक जैक्सन को हराया। बॉटम्स अटलांटा की पूर्व मेयर रह चुकी हैं और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की सलाहकार भी थीं।
वहीं, जॉर्जिया में डेमोक्रेट सीनेटर जॉन ओसॉफ अपनी सीट बचाने में सफल रहे। नॉर्थ कैरोलिना में भी डेमोक्रेट उम्मीदवार रॉय कूपर ने रिपब्लिकन पार्टी से सीनेट सीट छीन ली। इन नतीजों से सीनेट में बहुमत बनाए रखने के लिए रिपब्लिकन पार्टी की चुनौती बढ़ गई है।
ट्रंप के लिए क्यों अहम हैं मिडटर्म चुनाव के नतीजे?
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 37 सीटों के लिए मतदान हुआ। इसके अलावा, 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनाव कराए गए। इन चुनावों के नतीजों से तय होता है कि राष्ट्रपति की पार्टी संसद के दोनों सदनों में अपना नियंत्रण बनाए रख पाती है या नहीं।
चुनाव से पहले हुए सर्वे में अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र की स्थिति मतदाताओं के प्रमुख मुद्दों में शामिल थे। शुरुआती सर्वे के मुताबिक, बड़ी संख्या में मतदाता देश की स्थिति और ट्रंप के कामकाज से संतुष्ट नहीं थे। ऐसे में टेक्सास जैसे रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत राज्य में हार को पार्टी के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।
अगर डेमोक्रेट्स सीनेट और प्रतिनिधि सभा, दोनों में बहुमत हासिल करते हैं, तो ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बाकी दो वर्षों में उन्हें कानून बनाने और अपनी नीतियां लागू करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
