उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव के परिणाम सामने आ चुके हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में 5 सीटें आई हैं। सीटों के आंकड़े के लिहाज से बीजेपी को कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन समाजवादी पार्टी को पिछले चुनाव की तुलना में दो सीटों का सीधा फायदा मिला है। सपा ने विशेष रूप से लखनऊ और वाराणसी जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर परचम लहराया है। इस परिणाम से गदगद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे बीजेपी की ‘डबल इंजन की डबल हार’ करार दिया है।
चुनाव नतीजों का पूरा समीकरण
विधान परिषद की सभी 11 सीटों के फाइनल नतीजों के अनुसार इस बार किसी भी निर्दलीय उम्मीदवार को सफलता नहीं मिली है, जबकि पिछले चुनाव में दो सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते थे। बीजेपी ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर कब्जा जमाया, जो पिछली बार निर्दलीय के पास थी। वहीं, सपा ने बड़ा उलटफेर करते हुए बीजेपी के कब्जे वाली लखनऊ स्नातक सीट छीन ली और आगरा शिक्षक सीट पर भी निर्दलीय उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की।
इसके अलावा, अखिलेश यादव के लिए सबसे बड़ी राहत और खुशी की बात यह रही कि सपा ने वाराणसी की शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों पर अपना पुराना कब्जा बरकरार रखा। प्रयागराज-झांसी स्नातक सीट पर भी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ने जीत हासिल की है।
11 सीटों के परिणाम
| सीट का नाम | विजयी पार्टी |
|---|---|
| मेरठ (शिक्षक) | बीजेपी |
| बरेली-मुरादाबाद (शिक्षक) | बीजेपी |
| लखनऊ (शिक्षक) | बीजेपी |
| गोरखपुर-फैजाबाद (शिक्षक) | बीजेपी |
| आगरा (स्नातक) | बीजेपी |
| मेरठ (स्नातक) | बीजेपी |
| वाराणसी (शिक्षक) | सपा |
| वाराणसी (स्नातक) | सपा |
| आगरा (शिक्षक) | सपा |
| लखनऊ (स्नातक) | सपा |
| प्रयागराज-झांसी (स्नातक) | सपा |
अखिलेश यादव का बीजेपी पर तीखा हमला
चुनाव परिणामों के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक ‘फ्लॉप शो’ बन चुकी है और वाराणसी में पहले काउंटिंग तथा फिर री-काउंटिंग दोनों में उसकी हार हुई है। उन्होंने इस चुनाव परिणाम को आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की प्रस्तावना बताया।
अखिलेश यादव ने कहा कि यह नतीजा बीजेपी की ‘शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा’ विरोधी नीतियों की हार है और पढ़े-लिखे बेरोजगार स्नातकों ने अपना स्पष्ट फैसला सुना दिया है। उन्होंने यह दावा भी किया कि बीजेपी की नीतियों से पीड़ित होकर सभी वर्ग एक साथ आ गए हैं, जिससे पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का जनाधार अब 95 प्रतिशत हो गया है।
प्रिय मतदाताओं, भाजपा एक ‘फ़्लॉप शो’ बन गई है। भाजपा वाले वाराणसी में पहले ‘काउंटिंग’ में हारे, फिर दोबारा ‘री-काउंटिंग’ में हारे, मतलब दो बार मतगणना हुई और दोनों बार भाजपा और उनके संगी-साथी हारे। ये डबल इंजन की डबल हार है। विधान परिषद के चुनावों में भाजपा की हार ने 2027 में होने वाले उ.प्र. विधानसभा चुनाव की प्रस्तावना लिख दी है। ये एक तरफ़ भाजपा की ‘शिक्षक, शिक्षार्थी व शिक्षा’ विरोधी नीतियों की हार है, तो दूसरी तरफ़ पढ़े-लिखे ‘बेरोज़गार स्नातकों’ ने भी अपना फ़ैसला सुना दिया है। भाजपा ने हर समाज को जिस तरह ‘पीड़ित, दुखी, अपमानित’ किया है, उससे सभी उत्पीड़ित एक साथ आ गए हैं। पीडीए का जनाधार अब 95% हो गया है, क्योंकि ‘जो पीड़ित, वो पीडीए’! इससे भाजपा में अस्तित्व का संकट शुरू हो गया है, क्योंकि भाजपा के अंदर तो सभी लोग जानते हैं कि जो सीटें भाजपा जीती भी है, वो भी हेराफेरी से जीती गई हैं। भाजपा की अंदरूनी फूट से डबल इंजन की टकराहट और बढ़ गई है। इसीलिए भाजपाई प्रत्याशी विधानसभा चुनाव लड़ने की हिम्मत पूरी तरह हार गए हैं। जो भाजपा अब तक प्रत्याशियों का सर्वे करा रही थी, वो अब दूरबीन लेकर प्रत्याशी ढूँढ़ रही है, पर कहीं कोई नज़र नहीं आ रहा है। भाजपा की टिकट की खिड़की खाली है। इस उत्साहवर्धक जीत के लिए उ.प्र. के परम आदरणीय शिक्षकगण व अपने भविष्य के लिए चिंतित युवाओं का हम हृदय से आभार प्रकट करते हैं कि उन्होंने न केवल हमें वोट दिया, बल्कि हमारे ‘पीडीए प्रहरियों’ के साथ यथासंभव निगरानी भी रखी और प्रमाणपत्र मिलने तक डटे रहे। हम अपने सभी जीते हुए प्रत्याशियों को बधाई देते हैं और उनको भी, जिनको चालबाज़ी-जालसाज़ी से हराया गया। दरअसल हमारा कोई भी प्रत्याशी हारा नहीं है, बस वो भाजपाई हेराफेरी के आगे जीत नहीं पाया। हम उनका भी बराबर अभिनंदन करते हैं। हमारे लिए वे सब भी बिना सर्टिफ़िकेट के विजेता हैं। यही सजगता और एकजुटता 2027 में हमारी सरकार बनाने के लिए ‘निर्णायक नींव’ बनेगी। पुनः सभी मतदाताओं को कोटि-कोटि हार्दिक धन्यवाद! आपका अखिलेश
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 29, 2026
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि बीजेपी जिन सीटों पर जीती है, वहां भी हेराफेरी की गई है। उन्होंने मतदाताओं, शिक्षकों और युवाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रत्याशियों को भले ही प्रशासनिक चालबाजी से प्रमाण पत्र न मिला हो, लेकिन जनता की नजरों में वे सभी विजेता हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यही एकजुटता 2027 में सपा की सरकार बनाने की निर्णायक नींव साबित होगी।
