बिहार के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में मोकामा से विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत बढ़ाने से साफ इनकार करते हुए 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का कड़ा आदेश दिया है। अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला आज 30 अक्टूबर को सुनाया, जो संयोगवश दुलारचंद यादव की हत्या की पहली बरसी का दिन भी है।
उल्लेखनीय है कि दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को बिहार में चुनाव के दौरान हुई एक हिंसक झड़प में कर दी गई थी, जिसमें अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया था। इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी, जिसे दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द करते हुए अनंत सिंह को तय समय सीमा के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
जेडीयू से निष्कासन और सरकारी आवास खाली करने का नोटिस
कानूनी झटकों के बीच राजनीतिक मोर्चे पर भी अनंत सिंह की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इसके अलावा उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। निष्कासन के बाद प्रशासन ने नीलम देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस भी जारी कर दिया है।
जेल में रहते हुए जीता था चुनाव, लंबे आपराधिक इतिहास के आधार पर रद्द हुई जमानत
30 अक्टूबर 2025 को हुई इस हत्या के बाद पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बावजूद उन्होंने जेल में रहते हुए ही मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव में जीत हासिल की थी। इसके बाद मार्च 2026 में उन्हें पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। हालांकि अनंत सिंह के लंबे आपराधिक रिकॉर्ड और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़ित परिवार के साथ-साथ राज्य सरकार ने भी जमानत का विरोध किया था।
सुप्रीम कोर्ट के इस नए फैसले के बाद अब अनंत सिंह के पास कोई कानूनी रास्ता नहीं बचा है और उन्हें हर हाल में 1 दिसंबर तक कानून के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।
