सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा (Meta) को प्राइवेसी से जुड़े एक बेहद गंभीर मामले में अदालत की तरफ से तगड़ा झटका लगा है। अमेरिकी अदालत ने मेटा को चर्चित कैंब्रिज एनालिटिका डेटा स्कैम से जुड़े मामले में 25 बिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा के अनुसार लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना चुकाने का कड़ा आदेश दिया है। टेक जगत के इतिहास में किसी भी कंपनी पर लगाया गया यह अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना माना जा रहा है। हालांकि, दूसरी तरफ मेटा ने इस अदालती फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसके खिलाफ जल्द ही ऊपरी अदालत में अपील करने का ऐलान किया है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने पाया कि फेसबुक और मेटा के कामकाज के तौर-तरीकों ने राज्य के कंज्यूमर प्रोटेक्शन लॉ का सीधे तौर पर खुला उल्लंघन किया है। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे मामले में मुख्य आरोप यह था कि फेसबुक ने अपने डेटा कलेक्शन के तरीकों और प्लेटफॉर्म पर लोगों को हानिकारक (हार्मफुल) कंटेंट से सुरक्षित रखने के अपने दावों को लेकर अपने ही यूजर्स को पूरी तरह से गुमराह किया था।
दोषी पाया गया फेसबुक और अदालत का कड़ा फैसला
यह ऐतिहासिक अदालती आदेश सितंबर में आए जूरी के उस फैसले के ठीक बाद आया है, जिसमें मेटा को न्यू मैक्सिको के अनफेयर प्रैक्टिस लॉ के 4.3 करोड़ से अधिक उल्लंघनों के लिए सीधे तौर पर दोषी और जिम्मेदार ठहराया गया था। इस कानून के प्रावधान के तहत प्रत्येक उल्लंघन के लिए अधिकतम 5,000 डॉलर तक के सिविल जुर्माने का नियम है। हालांकि, शुरुआती अदालती फाइलिंग के दौरान यह जुर्माना लगभग 219.5 बिलियन डॉलर तक का दिख रहा था, लेकिन अदालत ने अपने अंतिम आदेश में इसे घटाकर 25 बिलियन डॉलर तय कर दिया है।
न्यू मैक्सिको जिला अदालत के न्यायाधीश फ्रांसिस मैथ्यू ने अपने फैसले में विस्तार से लिखा है कि फेसबुक ने जानबूझकर अनगिनत बार नियमों का उल्लंघन किया है। फेसबुक के शीर्ष नेतृत्व की इसमें संलिप्तता और न्यू मैक्सिको के नागरिकों के बड़े पैमाने पर प्रभावित होने के कारण, कानून के तहत अधिकतम 5,000 डॉलर प्रति उल्लंघन का सबसे कड़ा जुर्माना लगाया जाना पूरी तरह से उचित है। इसके साथ ही न्यायाधीश ने यह भी आदेश दिया है कि जब तक इस जुर्माने की पूरी राशि का भुगतान नहीं कर दिया जाता, तब तक इस पर सालाना 15 प्रतिशत की दर से ब्याज भी जुड़ता रहेगा।
न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज़ ने इस बड़े फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बहुत लंबे समय से शक्तिशाली टेक्नोलॉजी कंपनियां यह सोचकर काम कर रही थीं कि उनका आकार और उनका प्रभाव उन्हें कानून की पहुंच से ऊपर रखता है। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक जुर्माना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि कानून तोड़ने के बेहद गंभीर परिणाम भुगतने ही पड़ते हैं।
मेटा का पक्ष और कैंब्रिज एनालिटिका स्कैम से जुड़ाव
अदालत के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मेटा के चीफ लीगल ऑफिसर सी. जे. महोनी ने फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कंपनी को पूरा भरोसा है कि वे उच्च अदालत में अपील के दौरान इस मुकदमे को जीत जाएंगे। उन्होंने तर्क दिया कि यह फैसला न्यू मैक्सिको राज्य में व्यापार करने के माहौल को बेहद कठिन और प्रतिकूल बना देगा। उनके अनुसार, यह मुकदमा बुनियादी तौर पर इंटरनेट पर लोग क्या बोल सकते हैं, इसके नए नियम लागू करने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक प्रकार का टैक्स लगाने जैसा है।
आपको बता दें कि यह पूरा विवाद साल 2018 में सामने आए कुख्यात कैंब्रिज एनालिटिका स्कैम से शुरू हुआ था। उस समय इस राजनीतिक कंसल्टिंग फर्म पर गंभीर आरोप लगे थे कि उसने दुनिया भर के लगभग 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स के व्यक्तिगत डेटा को उनकी बिना किसी अनुमति के गलत तरीके से एक्सेस किया था, जिसके बाद फेसबुक की डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा व्यवस्था पर दुनिया भर में गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। हालिया अदालती दस्तावेजों में न्यायाधीश मैथ्यू ने यह भी स्पष्ट किया है कि फेसबुक इस बड़े घोटाले के बाद अपनी प्राइवेसी और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करने के अपने वादों को पूरा करने में पूरी तरह से विफल साबित हुआ है।
