हूतियों के हमलों के बीच एक्टिव हुआ मक्का डिफेंस पैक्ट, सऊदी की मदद को तुर्की-पाकिस्तान करेंगे सैन्य तैनाती

सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के कथित मिसाइल हमलों के बाद मध्य पूर्व में नया सैन्य समीकरण बनता दिखाई दे रहा है। रियाद में हुई आपात बैठक के बाद सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने सामूहिक रक्षा समझौते को सक्रिय करने और सऊदी अरब में तुर्की व पाकिस्तानी सैन्य बलों की तैनाती का फैसला किया है।

सऊदी अरब में तुर्की-पाकिस्तान की सेना होगी तैनात
सऊदी अरब में तुर्की-पाकिस्तान की सेना होगी तैनात

रियाद: सऊदी अरब के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों और पवित्र शहरों के आसपास हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए मिसाइल हमलों के बाद मध्य पूर्व का नया सैन्य गठबंधन तुरंत सक्रिय हो गया है। रियाद में आयोजित एक आपातकालीन बैठक के बाद सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने घोषणा की है कि सामूहिक रक्षा समझौते के तहत तुर्की और पाकिस्तान की सेनाएं तेजी से सऊदी अरब में तैनात की जाएंगी।

यह कड़ा कदम हूती विद्रोहियों द्वारा मदीना के पावर स्टेशन और रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के बाद उठाया गया है। हूतियों ने अरामको की तेल रिफाइनरी और खमीस मुशैत स्थित सामरिक एयरबेस को भी निशाना बनाने का दावा किया है।

7 अगस्त 2026 का ऐतिहासिक मक्का समझौता

उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष 7 अगस्त 2026 को मक्का में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच एक त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के तहत प्रावधान है कि तीनों में से किसी भी एक देश पर हुआ हमला बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि ‘कलेक्टिव डिफेंस कमिटमेंट’ (सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता) के तहत सऊदी अरब में सेना की तैनाती शुरू की जा रही है।

गठबंधन सक्रिय: नौमान महमूद बने पहले महासचिव

सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी देते हुए लिखा कि पवित्र स्थलों की सुरक्षा और सऊदी पर हुए हमलों के खिलाफ तीनों देशों ने एकजुटता दिखाई है तथा जवाबी कार्रवाई के कड़े उपायों को एक्टिवेट कर दिया गया है।

आपात बैठक के दौरान पाकिस्तान के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद को इस सैन्य गठबंधन का पहला महासचिव (सेक्रेटरी-जनरल) नियुक्त किया गया है।

यमन युद्ध में आया नया मोड़

इस गठबंधन में नाटो (NATO) की दूसरी सबसे बड़ी सेना वाले देश तुर्की और दुनिया के एकमात्र मुस्लिम परमाणु शक्ति संपन्न देश पाकिस्तान के शामिल होने से यमन संकट ने अत्यंत गंभीर और नया मोड़ ले लिया है। तुर्की ने शुरुआती चरण में तकनीकी और रक्षात्मक सहायता भेजने की प्रतिबद्धता जताई है। लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमलों और सऊदी शिपिंग पर बैन के बीच इस त्रिपक्षीय गठबंधन का जमीनी स्तर पर उतरना पूरे क्षेत्र के शक्ति-संतुलन को बदल सकता है।

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