इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी ओला इलेक्ट्रिक एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। कंपनी के प्रमोटर भाविश अग्रवाल ने आगामी राइट्स इश्यू में निवेश करने के लिए अपनी 4.32 प्रतिशत हिस्सेदारी गिरवी रख दी है। कंपनी ने रविवार, 4 अक्टूबर को इस बात की आधिकारिक जानकारी दी। भाविश अग्रवाल का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब ओला इलेक्ट्रिक के शेयर अपने लिस्टिंग प्राइस से लगभग 60 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे हैं और बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है।
कंपनी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, भाविश अग्रवाल ने अपने 20 करोड़ शेयर ‘कृत्रिम डेटा सेंटर प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा जारी किए गए नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर के बदले गिरवी रखे हैं। इन डिबेंचर्स के जरिए जुटाई जाने वाली पूंजी का उपयोग ओला इलेक्ट्रिक के राइट्स इश्यू में उनकी व्यक्तिगत भागीदारी और निवेश को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
₹1,000 करोड़ जुटाने की योजना और रकम का इस्तेमाल
ओला इलेक्ट्रिक के बोर्ड ने 28 सितंबर को ₹1,000 करोड़ तक की पूंजी जुटाने के उद्देश्य से राइट्स इश्यू जारी करने की मंजूरी दी थी। इसके अंतर्गत कंपनी आंशिक भुगतान वाले इक्विटी शेयर जारी करने जा रही है। जुटाए जाने वाले कुल फंड में से लगभग ₹350 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी के ऊपर बकाये कर्ज को चुकाने या उसका अग्रिम भुगतान करने में किया जाएगा। वहीं, करीब ₹400 करोड़ की राशि का इस्तेमाल बिजनेस विस्तार और जैविक विकास (Organic Growth) से संबंधित योजनाओं पर होगा, जबकि शेष बची रकम को सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन
शेयर बाजार की बात करें तो ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का शेयर 1 अक्टूबर को 0.46 प्रतिशत की हल्की बढ़त के साथ ₹37.09 पर बंद हुआ था। हालांकि पिछले छह महीनों के दौरान कंपनी के शेयर में करीब 27.06 प्रतिशत की तेजी देखी गई है, लेकिन पिछले एक साल की अवधि में यह शेयर 29.51 प्रतिशत नीचे गिर चुका है। वर्तमान समय में भी यह अपने शुरुआती लिस्टिंग भाव की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत की गिरावट पर कारोबार कर रहा है।
कर्ज कम करने और व्यापार विस्तार की चुनौती
ओला इलेक्ट्रिक ने इससे पहले जून 2026 में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के माध्यम से ₹780 करोड़ की राशि जुटाई थी। अब इस राइट्स इश्यू के जरिए कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को भी पूंजी जुटाने की इस प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दे रही है। इस समय कंपनी के समक्ष अपने कर्ज के बोझ को कम करने, कारोबार को मजबूत बनाने और बाजार की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी स्थिति बेहतर करने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में राइट्स इश्यू से प्राप्त होने वाले फंड का उपयोग और आने वाली तिमाहियों में कंपनी के वित्तीय नतीजे निवेशकों के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।
