बागपत के चर्चित अंकित-इसरार हत्याकांड में पुलिस ने मुख्य आरोपी महंत बाबा नरेशनाथ को पश्चिम बंगाल के कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, दो दोस्तों की हत्या के बाद आरोपी ने उनके शव मंदिर परिसर में दफना दिए थे। इसके बाद वह हरिद्वार पहुंचा, गंगा में स्नान किया और फिर नेपाल चला गया। नेपाल में बाढ़ की स्थिति बनने के बाद वह कोलकाता पहुंचा, जहां पहचान छिपाने के लिए भिखारी का भेष बनाकर मंदिर के बाहर रहने लगा था।
मामला चांदीनगर थाना क्षेत्र के लहचौड़ा गांव स्थित गणेश मंदिर का है। 25 जुलाई को सिंगौली तगा गांव निवासी अंकित अपने दोस्त इसरार के साथ घर से निकला था, लेकिन दोनों वापस नहीं लौटे। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की। मोबाइल लोकेशन और अन्य सुरागों की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस का शक गणेश मंदिर परिसर तक पहुंचा। 13 अगस्त को मंदिर परिसर में खुदाई कराई गई, जिसमें जमीन के नीचे दोनों के शव मिले। पुलिस के अनुसार, शवों को छिपाने के बाद गड्ढे के ऊपर टाइल्स लगा दी गई थीं।
जांच के दौरान मंदिर के महंत नरेशनाथ का नाम मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया। पुलिस ने उसके दो शिष्यों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन नरेशनाथ घटना के बाद फरार हो गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया और कई टीमें उसकी तलाश में लगाई गईं। जांच के दौरान उसके नेपाल में होने की जानकारी भी सामने आई थी।
पुलिस के मुताबिक, नरेशनाथ की तलाश करते हुए टीम को उसकी आखिरी लोकेशन पश्चिम बंगाल के कोलकाता के विधाननगर इलाके में मिली। वहां पहुंचने पर पुलिस को पता चला कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए भिखारी का रूप अपना लिया था और एक मंदिर के बाहर रह रहा था। घेराबंदी के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ BNS की धारा 103(1), 238A/3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।
पूछताछ में नरेशनाथ ने अंकित की बहन के साथ कथित प्रेम संबंध की बात बताई। पुलिस के अनुसार, अंकित को इस संबंध की जानकारी हो गई थी और उसके पास दोनों से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी थीं। इन्हीं तस्वीरों को लेकर अंकित कथित तौर पर नरेशनाथ पर दबाव बना रहा था और उससे रुपये लेने की बात भी पूछताछ में सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, बदनामी के डर से नरेशनाथ ने अंकित को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
पूछताछ में सामने आए पुलिस के दावे के अनुसार, नरेशनाथ ने पहले अंकित और इसरार को नींद की गोली मिलाकर चाय पिलाई और बाद में दोनों की हत्या कर दी। इसरार उस समय अंकित के साथ था, इसलिए वह भी वारदात का शिकार हो गया। इसके बाद दोनों के शव मंदिर परिसर में दफना दिए गए और ऊपर टाइल्स लगाकर उन्हें छिपाने की कोशिश की गई। शुरुआती जांच में भी पुलिस ने कथित प्रेम संबंध को हत्या की वजह बताया था।
पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद नरेशनाथ पहले हरिद्वार गया और वहां गंगा में डुबकी लगाई। इसके बाद वह नेपाल पहुंचा, लेकिन वहां बाढ़ की स्थिति बनने के बाद भारत लौट आया और कोलकाता चला गया। विधाननगर में वह भिखारी के भेष में मंदिर के बाहर रह रहा था। पुलिस लगातार उसकी संभावित लोकेशन पर नजर रख रही थी और आखिरकार टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश किए जाने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
