बच्चों की सुरक्षा पर मेटा का ऐतिहासिक समझौता: 1.6 लाख करोड़ रुपये देगा मेटा, जकरबर्ग ने यूट्यूब और टिकटॉक को घेरा

Meta Settlement: बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामले में Meta अमेरिका के कई राज्यों के साथ हुए समझौते के तहत 17.1 अरब डॉलर तक भुगतान करने पर सहमत हुई है। Instagram और Facebook पर स्क्रीन टाइम सीमा, स्कूल-टाइम प्रतिबंध और बेहतर पैरेंटल कंट्रोल जैसे बदलाव प्रस्तावित हैं।

Meta 1.6 लाख करोड़ रुपये जुर्माना
Meta 1.6 लाख करोड़ रुपये जुर्माना

नई दिल्ली: बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद को खत्म करने के लिए Meta ने बड़ा समझौता किया है। रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी अमेरिका के 47 राज्यों, डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया और अन्य क्षेत्रों के साथ हुए सेटलमेंट के तहत कुल 17.1 अरब डॉलर तक भुगतान करने पर सहमत हुई है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये बैठती है।

इस समझौते का असर सिर्फ Meta की वित्तीय स्थिति तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसके तहत कंपनी को Instagram और Facebook पर बच्चों तथा किशोरों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करने होंगे। इनमें कम उम्र के यूजर्स के स्क्रीन टाइम को सीमित करना, स्कूल के समय ऐप्स की पहुंच पर रोक और अभिभावकों को अधिक प्रभावी निगरानी सुविधाएं देना शामिल है।

मामले से जुड़े समझौते के अनुसार Meta पर शुरुआती तौर पर 12 अरब डॉलर का जुर्माना तय किया गया है। कंपनी ने नाबालिग यूजर्स के लिए प्रतिदिन दो घंटे की उपयोग सीमा स्वीकार करने की बात कही है। हालांकि Meta का मानना है कि अगर यही व्यवस्था उसके प्रमुख प्रतिस्पर्धियों पर भी लागू हो, तो बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर ज्यादा प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

इसी सोच के तहत Meta ने YouTube और TikTok को भी इस व्यवस्था में शामिल करने की कोशिश शुरू की है। कंपनी का प्रस्ताव है कि दोनों प्लेटफॉर्म किशोरों के लिए रोजाना एक घंटे की उपयोग सीमा लागू करें और राज्यों को 5 अरब डॉलर का भुगतान करें। यदि ऐसा होता है तो Meta भी अपनी प्रस्तावित दो घंटे की सीमा घटाकर एक घंटे करने और अतिरिक्त 5 अरब डॉलर देने के लिए तैयार होगी।

इस रणनीति के पीछे Meta की एक बड़ी चिंता भी बताई जा रही है। कंपनी नहीं चाहती कि Instagram पर लगने वाली सख्त पाबंदियों के कारण युवा यूजर्स दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर चले जाएं। इसलिए Meta की कोशिश है कि किशोरों के लिए डिजिटल सुरक्षा के नियम केवल उसके प्लेटफॉर्म तक सीमित न रहें, बल्कि पूरे सोशल मीडिया क्षेत्र में समान मानक लागू हों।

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार Meta ने YouTube और TikTok को एक खुला पत्र भी भेजा है। इसमें दोनों कंपनियों से बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए समान नियम अपनाने की अपील की गई है। Meta इस मुद्दे को सार्वजनिक समर्थन दिलाने के लिए अमेरिकी अखबारों में विज्ञापन अभियान चलाने की तैयारी भी कर रही है।

हालांकि, Meta की इस पहल को अभी दोनों प्रतिस्पर्धी कंपनियों से खास समर्थन नहीं मिला है। YouTube ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है, जबकि TikTok की ओर से भी फिलहाल कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अमेरिकी सांसदों के एक वर्ग का मानना है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए केवल एक कंपनी पर नियम लागू करने के बजाय पूरे सोशल मीडिया उद्योग के लिए स्पष्ट सुरक्षा मानक बनाए जाने चाहिए।

इस विवाद की शुरुआत 2023 में हुई थी। अमेरिकी राज्यों ने Meta के खिलाफ आरोप लगाया था कि कंपनी ने ऐसे एल्गोरिद्म और फीचर्स तैयार किए, जो कम उम्र के यूजर्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने और उनमें सोशल मीडिया की निर्भरता बढ़ाने में मदद करते थे। राज्यों का आरोप था कि कंपनी को बच्चों पर अपने प्लेटफॉर्म के संभावित नकारात्मक प्रभावों की जानकारी थी, फिर भी उसने पर्याप्त कदम नहीं उठाए।

अब हुए समझौते के जरिए Meta इस कानूनी विवाद को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी इसे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए नए मानकों की शुरुआत के तौर पर पेश कर रही है। दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि इस कदम से Meta अपनी छवि सुधारने के साथ-साथ YouTube और TikTok जैसे प्रतिस्पर्धियों पर भी समान दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि प्रस्तावित स्क्रीन टाइम सीमा और अभिभावकीय नियंत्रण वास्तव में किस तरह लागू किए जाते हैं। साथ ही, अगर अन्य बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी इसी तरह के नियम अपनाते हैं, तो इसका असर बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के पूरे पैटर्न पर पड़ सकता है।

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