‘दिमागी नक्सल’ बयान पर सियासी घमासान, किरेन रिजिजू के बयान पर महबूबा मुफ्ती का पलटवार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में दिए गए ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पीएम मोदी ने सशस्त्र नक्सलवाद के बाद अब ऐसे वैचारिक समर्थकों से सतर्क रहने की अपील की थी, जो सिस्टम में रहकर नीतियों और समाज को प्रभावित कर सकते हैं।

दिमागी नक्सल बयान पर महबूबा मुफ्ती का जवाब
दिमागी नक्सल बयान पर महबूबा मुफ्ती का जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में दिए गए ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। प्रधानमंत्री ने देश को चेतावनी दी थी कि सशस्त्र नक्सलवाद के खत्म होने के बाद अब सिस्टम में पैठ बना चुके ऐसे वैचारिक समर्थकों से सतर्क रहने की जरूरत है जो नीतियों से खिलवाड़ कर समाज में अराजकता फैलाना चाहते हैं। उन्होंने नागरिकों से इन तत्वों को चिन्हित कर अलग-थलग करने की अपील की थी।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री के बयान का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण देते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री ने पूरे विपक्ष को यह नहीं कहा है। रिजिजू ने तीन बिंदु रखते हुए कहा कि माओवादियों का समर्थन करने वाले, अनुच्छेद 370 का समर्थन करने वाले अलगाववादी, और पूर्वोत्तर को भारत से काटने के लिए ‘चिकन नेक’ बंद करने की बात करने वाले ही असली ‘दिमागी नक्सल’ हैं।

किरेन रिजिजू के इस बयान पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जोरदार पलटवार किया। उन्होंने एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी और अपने पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की तस्वीर साझा करते हुए रिजिजू के पोस्ट का जवाब दिया कि वह अनुच्छेद 370 का समर्थन करती हैं, इसलिए वह ‘दिमागी नक्सल’ हैं।

दूसरी तरफ विपक्षी दलों के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताया है। राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री राजनीतिक शब्दावली का लगातार विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर अर्बन नक्सल पोस्ट ग्रेजुएशन है, तो दिमागी नक्सल पीएचडी जैसा है और इस रफ्तार से जल्द ही एक नई डिक्शनरी की जरूरत पड़ेगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने इसे बीजेपी की पुरानी राजनीतिक बयानबाजी से जोड़ते हुए कहा कि यह ‘अर्बन नक्सल’, ‘आंदोलनजीवी’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसा ही नया शब्द है। चिदंबरम ने आरोप लगाया कि ये सभी शब्द हमेशा से ही विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और उन्हें कटघरे में खड़ा करने के लिए गढ़े जाते रहे हैं।

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