8th Pay Commission: आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने पेंशनभोगियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए हैं। इनमें न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 45,000 रुपये महीना करने, अंतिम मूल वेतन के 67 प्रतिशत के बराबर पेंशन तय करने और पारिवारिक पेंशन को 50 प्रतिशत करने की मांग शामिल है। इसके अलावा सैलरी और पेंशन तय करने के लिए 5.2 वेटेड फैमिली यूनिट का आधार अपनाने का सुझाव भी दिया गया है।
राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुई 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की बैठकों में कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने अपनी मांगें आयोग के सदस्यों के सामने रखीं। इन्हीं संगठनों में भारत पेंशनर्स समाज यानी BPS भी शामिल है। BPS के प्रतिनिधिमंडल ने चेयरमैन आरके चौहान और महासचिव अविनाश राजपूत के नेतृत्व में नई दिल्ली के जनपथ स्थित चंद्रलोक भवन में आयोग के सामने अपनी मांगों और सुझावों का विस्तृत ब्यौरा पेश किया।
बैठक के दौरान BPS की ओर से केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशन पाने वालों से जुड़े मुद्दों पर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने अपने मेमोरेंडम में शामिल प्रमुख प्रस्तावों की जानकारी आयोग के सदस्यों को दी। BPS के अनुसार, आयोग के सदस्यों ने प्रस्तुति को ध्यान से सुना और प्रतिनिधियों के साथ इन मुद्दों पर बातचीत भी की।
भारत पेंशनर्स समाज की स्थापना जनवरी 1955 में हुई थी और संगठन के मुताबिक वह करीब 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करता है। BPS से 245 संबद्ध संघ जुड़े हुए हैं। संगठन को पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग तथा नीति आयोग से मान्यता प्राप्त है। इसके अलावा BPS स्वैच्छिक एजेंसियों की स्थायी समिति यानी SCOVA में भी प्रतिनिधित्व करता है। इसी वजह से संगठन की ओर से आठवें वेतन आयोग के सामने रखे गए प्रस्ताव पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

BPS ने न्यूनतम पेंशन तय करने के लिए 5.2 वेटेड फैमिली यूनिट का फार्मूला अपनाने की मांग की है। इसके तहत कर्मचारी के लिए 1.0 यूनिट, जीवनसाथी के लिए 1.0 यूनिट, दो बच्चों में से प्रत्येक के लिए 0.8 यूनिट और दो आश्रित माता-पिता में से प्रत्येक के लिए 0.8 यूनिट शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
संगठन ने न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये निर्धारित करने और इसके लिए 3.83 का फिटमेंट फैक्टर रखने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही न्यूनतम पेंशन 45,000 रुपये प्रति माह करने की मांग की गई है। BPS चाहता है कि पेंशन अंतिम प्राप्त वेतन के 67 प्रतिशत के आधार पर तय हो, जबकि पारिवारिक पेंशन अंतिम प्राप्त वेतन की 50 प्रतिशत हो।
पेंशन में समानता को लेकर भी BPS ने अपना प्रस्ताव रखा है। संगठन के मुताबिक पेंशन में उचित संशोधन किया जाना चाहिए और 1 जनवरी 2026 से पहले तथा उसके बाद सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनभोगियों के बीच समानता सुनिश्चित होनी चाहिए। संगठन ने वेतन और पेंशन में हर पांच साल में बदलाव करने की मांग भी रखी है।
महंगाई भत्ते और महंगाई राहत को लेकर BPS ने हर तीन महीने में संशोधन का सुझाव दिया है। इसके लिए तीन महीने के औसत के आधार पर DA और DR में बढ़ोतरी करने की मांग की गई है। संगठन ने यह भी कहा है कि जब DR 25 प्रतिशत से ज्यादा हो जाए तो उसे बेसिक पेंशन में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए।
पेंशनभोगियों के लिए HRA और LTC की सुविधा को लेकर भी मांग रखी गई है। BPS चाहता है कि पेंशनभोगियों को उचित हाउस रेंट अलाउंस और लीव ट्रैवल कंसेशन का लाभ मिले। केंद्रीय स्वायत्त और वैधानिक निकायों के योग्य पेंशनभोगियों को भी आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के लाभ एक साथ देने का प्रस्ताव रखा गया है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के मोर्चे पर संगठन ने CGHS को मजबूत और विस्तारित करने की बात कही है। BPS ने कैशलेस स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने और फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस यानी FMA को बढ़ाकर 5,000 रुपये करने की मांग की है। ग्रामीण और गैर-CGHS क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनभोगियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का सुझाव भी दिया गया है।
कम्यूटेड पेंशन की बहाली को लेकर BPS ने कहा है कि 60 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन के कम्यूटेड हिस्से को 11 साल बाद या 71 साल की उम्र पूरी होने पर, जो भी पहले हो, बहाल किया जाना चाहिए। इसके अलावा 65 साल की उम्र से उम्र के आधार पर अतिरिक्त पेंशन देने का प्रस्ताव है, जिसमें पांच साल के स्लैब का आधार रखा जाए।
संगठन ने संशोधित वेतन, पेंशन और भत्तों को 1 जनवरी 2026 से लागू करने की मांग भी की है। इसके साथ BSNL पेंशनभोगियों से जुड़े पेंशन समानता और स्वास्थ्य सेवाओं के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को हल करने का प्रस्ताव रखा गया है।
आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के साथ हुई बातचीत को लेकर BPS ने संतोष जताया है। संगठन को उम्मीद है कि आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करते समय पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों की जायज मांगों और उनकी चिंताओं को उचित महत्व देगा। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन, भत्तों तथा सेवा से जुड़े अन्य लाभों की समीक्षा करनी है और इसी प्रक्रिया के तहत अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनर संगठन अपने प्रस्ताव आयोग के सामने रख रहे हैं।
