Aniruddha Vinayaka Chaturthi 2026: अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और धार्मिक महत्व

Aniruddha Vinayaka Chaturthi 2026: इस साल विनायक चतुर्थी पर रवि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। भगवान गणेश के पूजन के लिए सबसे श्रेष्ठ मध्याह्न काल का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, असरदार मंत्र और ज्योतिषीय उपाय यहां देखें।

आषाढ़ अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी 2026 (Image: ChatGPT)
आषाढ़ अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी 2026 (Image: ChatGPT)

Aniruddha Vinayaka Chaturthi 2026: आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाई जाने वाली अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी भगवान श्रीगणेश को समर्पित एक अत्यंत शुभ और पुण्यदायी व्रत मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश के अनिरुद्ध विनायक स्वरूप की विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, रुके हुए कार्य पूरे होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत रखकर गणपति बप्पा को दूर्वा, मोदक, लाल पुष्प और सिंदूर अर्पित करते हैं। इस वर्ष अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी पर रवि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन की गई पूजा का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 17 जुलाई 2026 को सुबह 6 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 18 जुलाई 2026 को सुबह 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। भगवान गणेश की मध्याह्न पूजा का शुभ मुहूर्त 17 जुलाई को सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणपति पूजन के लिए मध्याह्न काल सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

गणेश पुराण और शिव पुराण में वर्णित कथा के अनुसार देवी पार्वती ने भगवान गणेश की रचना की थी और भगवान शिव ने उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। तभी से किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से करने की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है कि अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी के दिन उनकी आराधना करने से विघ्नों का नाश होता है और जीवन में सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और सिद्धि के अधिपति हैं। इसलिए यह व्रत विशेष रूप से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, नए कार्य की शुरुआत करने वाले लोगों और करियर में सफलता की कामना रखने वालों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत तथा पूजा करने से मानसिक एकाग्रता बढ़ती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।

पूजा के दौरान भगवान गणेश को 21 दूर्वा, लाल या पीले पुष्प, मोदक या बेसन के लड्डू, सिंदूर, चंदन, अक्षत, धूप-दीप, नारियल और मौसमी फल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के समय “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करने के साथ “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥” मंत्र का पाठ भी अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करने, मोदक का भोग लगाने, गणेश अथर्वशीर्ष या गणेश चालीसा का पाठ करने, जरूरतमंदों को हरी वस्तुओं का दान करने तथा गाय को गुड़ और हरा चारा खिलाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इन उपायों को करने से आर्थिक बाधाएं दूर होने, परिवार में सुख-शांति आने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है।

सनातन धर्म में अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की पूजा करने से धन-धान्य, बुद्धि, विवेक, संतान सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही व्यक्ति के रुके हुए कार्य पूरे होने, नकारात्मकता दूर होने और आत्मविश्वास तथा आध्यात्मिक उन्नति में वृद्धि होने का भी विश्वास किया जाता है।

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