Ashadha Gupt Navratri 2026: पुष्य और हर्षण योग के दुर्लभ संयोग में शुरू हो रहे गुप्त नवरात्रि, नोट कर लें कलश स्थापना का महामुहूर्त

Ashadha Gupt Navratri 2026: हर साल दो बार गुप्त नवरात्रि मनाए जाते हैं। पहला आषाढ़ मास में और दूसरा माघ मास में। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होती है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 कब से है (Image: ChatGPT)
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 कब से है (Image: ChatGPT)

Ashadha Gupt Navratri 2026: हर साल सनातन धर्म में दो बार गुप्त नवरात्रि मनाने की परंपरा है, जिनमें से पहले आषाढ़ मास में और दूसरे माघ मास में आते हैं। पंचांग के दृष्टिकोण से इस समय आषाढ़ का महीना चल रहा है और इस महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का आरंभ होता है। धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि को आत्मशुद्धि, कठिन शक्ति साधना और मां भगवती की गुप्त आराधना के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। इस वर्ष के गुप्त नवरात्रि को ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद मंगलकारी और खास माना जा रहा है क्योंकि इस बार इसके शुभारंभ पर हर्षण और पुष्य योग का एक दुर्लभ व अद्भुत संयोग बन रहा है।

कब से शुरू होंगे गुप्त नवरात्रि?

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, इस साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 14 जुलाई 2026 को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर हो जाएगी। इस प्रतिपदा तिथि का समापन अगले दिन यानी 15 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर होगा। शास्त्रों में उदयातिथि की मान्यता को सर्वोपरि माना जाता है, इसलिए उदयातिथि के नियमों के आधार पर आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई 2026, दिन बुधवार से होने जा रही है।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन कलश या घट स्थापना का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के घट स्थापना का सबसे शुभ और उत्तम मुहूर्त 15 जुलाई की सुबह 5 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। सभी श्रद्धालु और साधक इस शुभ समयावधि के बीच पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ अपने घरों या पूजा स्थलों में कलश की स्थापना कर अपनी साधना शुरू कर सकते हैं।

हर्षण और पुष्य योग का संयोग

इस साल की गुप्त नवरात्रि की एक और बड़ी विशेषता यह है कि इसकी शुरुआत बेहद शुभ माने जाने वाले हर्षण और पुष्य योग में हो रही है। प्रतिपदा तिथि के दिन हर्षण योग सूर्योदय के समय से लेकर सुबह 8 बजकर 4 मिनट तक सक्रिय रहेगा, जिसके बाद वज्र योग शुरू हो जाएगा जो अगले दिन सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही, पहले ही दिन नक्षत्रों के राजा पुष्य का योग भी बन रहा है, जो रात को 9 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इन शुभ योगों की उपस्थिति के कारण इस समय की गई पूजा-अर्चना का फल कई गुना अधिक प्राप्त होगा।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 की प्रमुख तिथियां

15 जुलाई (बुधवार): प्रतिपदा, घटस्थापना और गुप्त नवरात्रि आरंभ
16 जुलाई (गुरुवार): द्वितीया
17 जुलाई (शुक्रवार): तृतीया
18 जुलाई (शनिवार): चतुर्थी
19 जुलाई (रविवार): पंचमी
20 जुलाई (सोमवार): षष्ठी
21 जुलाई (मंगलवार): सप्तमी
22 जुलाई (बुधवार): अष्टमी
23 जुलाई (गुरुवार): नवमी, कन्या पूजन और व्रत समापन

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 Breaking News Wale - Latest Hindi News by Breaking News Wale