पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पानी के मुद्दे को लेकर भारत के साथ ‘जल युद्ध’ की खुली धमकी दी है। आसिफ की यह गीदड़ भभकी भारत द्वारा सिंधु जल संधि पर रोक लगाने के फैसले के बाद आई है। भारत सरकार ने पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद से ही पाकिस्तान में भारी बौखलाहट देखी जा रही है। इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आसिफ ने कहा कि अगर यह मामला शांतिपूर्ण ढंग से हल नहीं हुआ, तो अल्लाह न करे, पानी को लेकर दोनों देशों के बीच युद्ध भी हो सकता है।
भारत पर लगाया पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बर्बाद करने का आरोप
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने यह विवादित बयान बुधवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर आयोजित एक सेमिनार में दिया। इस सेमिनार का आयोजन मुख्य रूप से भारत के खिलाफ एक नकारात्मक नैरेटिव सेट करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सेमिनार में बोलते हुए आसिफ ने दावा किया कि भारत पानी को जानबूझकर विवाद का मुद्दा बनाने पर आमादा है। इसके साथ ही उन्होंने भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह पाकिस्तान की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को सोची-समझी रणनीति के तहत बर्बाद करने की कोशिश कर रहा है।
ख्वाजा आसिफ ने अपनी बात के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे को लेकर वर्ष 1960 में हुआ समझौता दोनों देशों के बीच हुए कई युद्धों के बावजूद इतने दशकों तक बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक चलता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आसिफ की यह धमकियां पाकिस्तान की उस कूटनीतिक कोशिश का हिस्सा हैं, जिसके जरिए वह इस द्विपक्षीय पानी विवाद को एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश में जुटा है।
भारत के कड़े फैसले के आगे लाचार हुआ इस्लामाबाद
पिछले कई दशकों से पाकिस्तान की पूरी कूटनीति मुख्य रूप से केवल कश्मीर मुद्दे के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। लेकिन पिछले वर्ष भारत द्वारा सिंधु जल संधि पर रोक लगाने के सख्त फैसले ने इस्लामाबाद को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। अब पानी का यह संकट पाकिस्तान की वैश्विक बातचीत और कूटनीति का सबसे अहम हिस्सा बन गया है, जिसे वह दुनिया के सामने उठाने की कोशिश कर रहा है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने बदला था रुख
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया था। इस कायराना आतंकी हमले में 26 आम नागरिकों की जान चली गई थी, जिसे पाकिस्तान की धरती से संचालित होने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने अंजाम दिया था।
इस हमले के तुरंत बाद भारत ने दशकों से चली आ रही अपनी पुरानी नीति को पूरी तरह पलट दिया। भारत ने कड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि पर अंतरिम रोक लगा दी और इसके तहत पाकिस्तान के साथ होने वाले हर तरह के सहयोग को पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे पाकिस्तान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
