Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल में हर स्तर पर सुरक्षा और प्रबंधन की बेहद चौंकाने वाली व घोर लापरवाही सामने आई है। एसआईटी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि मंदिर के दान पात्रों से लेकर बैंक खातों में रकम जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रख दिया गया था, जिसका फायदा उठाकर कर्मचारियों ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र में सेंध लगा दी। इस बीच, मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में आज (सोमवार) एक जनहित याचिका पर अहम सुनवाई होनी तय हुई है, जिसमें इस पूरे घोटाले की सीबीआई (CBI) जांच और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से स्पेशल ऑडिट कराने की मांग की गई है।
निजी एजेंसी और सिफारिशी प्रथा से हुई नियुक्तियां
एसआईटी की प्रारंभिक जांच के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट की दान राशि और चढ़ावे के प्रबंधन व बैंकिंग कामकाज की जिम्मेदारी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पास थी। एसबीआई का मुख्य काम नोटों को अलग करना, गड्डियां बनाना और उनकी गिनती करवाना था। इसके लिए एसबीआई ने वाराणसी की एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी को ठेका दे रखा था। इस निजी एजेंसी ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों की सिफारिश पर अयोध्या के ही स्थानीय लड़कों को नोट गिनने के बेहद संवेदनशील काम पर रख लिया।
सिफारिश पर नौकरी देने की इसी व्यवस्था के तहत अनुकल्प मिश्रा नाम के एक व्यक्ति ने अपने सले लवकुश मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर नोट गिनने के काम पर लगवा दिया था। एसआईटी को पता चला है कि इन नियुक्तियों के दौरान सुरक्षा मानकों और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (पृष्ठभूमि की जांच) की पूरी तरह अनदेखी की गई।
बिना चेकिंग घरेलू कपड़ों में एंट्री, सीसीटीवी के सामने खड़े होकर चोरी
जांच में सबसे हैरान करने वाली बात ड्यूटी पर आने-जाने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा जांच (चेकिंग) को लेकर सामने आई है। नोट गिनने वाले कमरों में आने और जाने के दौरान कर्मचारियों की कोई पुख्ता शारीरिक जांच नहीं होती थी। कौन कर्मचारी क्या लेकर अंदर आ रहा है और अपने साथ क्या बाहर ले जा रहा है, इसकी निगरानी करने वाला कोई नहीं था। निर्धारित नियमों के तहत सभी नोट काउंटर्स के लिए एक विशिष्ट ड्रेस कोड बनाया गया था और कर्मचारियों को वर्दी भी दी गई थी, लेकिन प्रबंधन की ढिलाई के कारण कोई भी कर्मचारी ड्रेस कोड का पालन नहीं करता था। लोग अपने सामान्य घरेलू कपड़ों में ही राम मंदिर ट्रस्ट के अति-संवेदनशील कमरों में बैठकर नोट गिनने लग जाते थे।
सुरक्षा कैमरों (CCTV) की मॉनिटरिंग में भी भारी लापरवाही पाई गई है। फुटेज खंगालने पर एसआईटी ने देखा कि शातिर कर्मचारी चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए जानबूझकर सीसीटीवी कैमरों के ठीक सामने इस तरह खड़े हो जाते थे कि कैमरे का विजुअल ब्लॉक (बाधित) हो जाए, और इसी की आड़ में वे आसानी से नोट गायब कर देते थे। दान पेटी को मंदिर परिसर से ट्रस्ट के कमरे तक ले जाने और वहां से बैंक में जमा करने की पूरी चेन में हर कदम पर गंभीर खामियां मिली हैं।
जांच के दायरे में आए लोगों के अयोध्या छोड़ने पर पाबंदी
प्रारंभिक निष्कर्षों के बाद अब एसआईटी अपनी अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने में जुट गई है। सबूतों और बयानों के साथ छेड़छाड़ को रोकने के लिए एसआईटी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए जांच के दायरे में आए सभी अधिकारियों, बैंक व सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारियों और संदिग्ध सेवादारों को बिना पूर्व सूचना के अयोध्या छोड़ने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। उन्हें सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि अपरिहार्य कारणों से उन्हें शहर से बाहर जाना भी पड़ता है, तो उन्हें पहले एसआईटी के समक्ष इसकी लिखित जानकारी देनी होगी ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत पूछताछ के लिए बुलाया जा सके।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में आज बड़ी सुनवाई
दूसरी तरफ, राम मंदिर के चढ़ावे और दान राशि के इस कथित गबन को लेकर कानूनी लड़ाई भी तेज हो गई है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसमें देश के शीर्ष ऑडिट संस्थान कैग (CAG) से मंदिर के खातों का ऑडिट कराने और मामले की कमान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई है।
यह मामला सोमवार को कोर्ट नंबर-2 में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। याचिकाकर्ता पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित अशोक शर्मा ने बताया कि चूंकि यह पूरा मामला देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों की अटूट आस्था और व्यापक जनहित से सीधा जुड़ा हुआ है, इसलिए वे आज अदालत के समक्ष विशेष उल्लेख (मेंशनिंग) कर इस पर प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करेंगे। अधिवक्ता के अनुसार, यदि आवश्यकता पड़ी तो मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे मुख्य पूरक सूची (सप्लीमेंट्री लिस्ट) में शामिल कराने का आग्रह भी खंडपीठ से किया जाएगा। वर्तमान में अयोध्या से लेकर लखनऊ तक की निगाहें कोर्ट के रुख और एसआईटी की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
