Bharat Bhagya Vidhata Box Office: कंगना रनौत के अभिनय से सजी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ ने बॉक्स ऑफिस पर पहले ही हफ्ते में दम तोड़ दिया है, जिसने अभिनेत्री को उनके करियर का एक और बड़ा और तगड़ा झटका दिया है।
बॉक्स ऑफिस के इतिहास को देखें तो साल 2015 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ और साल 2019 में बॉक्स ऑफिस पर औसत (एवरेज) प्रदर्शन करने वाली फिल्म ‘मणिकर्णिका’ के बाद, यह कंगना रनौत की सिनेमाघरों में लगातार 12वीं फ्लॉप फिल्म साबित हुई है। साल 2008 में मुंबई में हुए भयानक 26/11 आतंकी हमले के दौरान कामा अस्पताल के जांबाज कर्मचारियों के अदम्य साहस और संघर्ष की सच्ची कहानी को बड़े पर्दे पर पेश करने वाली यह फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में पूरी तरह नाकाम रही।
अपनी रिलीज के सातवें दिन यानी गुरुवार को इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बेहद निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए महज ₹45 लाख की नेट कमाई की है।
लगभग ₹60 करोड़ के भारी-भरकम बजट के साथ भव्य पैमाने पर तैयार की गई यह फिल्म अपने पहले पूरे हफ्ते के सफर के बाद घरेलू बाजार में महज ₹6.55 करोड़ का ही कुल नेट कलेक्शन बटोर पाई है। अगर इसके पहले सप्ताह के डे-वाइज कलेक्शन के उतार-चढ़ाव भरे सफर को समझें, तो फिल्म ने अपने पहले दिन यानी शुक्रवार को ₹1.00 करोड़ की बेहद ठंडी ओपनिंग के साथ शुरुआत की थी। इसके बाद शनिवार को थोड़ी बढ़त के साथ इसने ₹1.45 करोड़ कमाए और रविवार को इसका कलेक्शन ₹1.80 करोड़ तक पहुंच पाया, जो कि इसका अब तक का सबसे बड़ा सिंगल-डे कलेक्शन रहा।
वीकेंड खत्म होते ही सोमवार को कामकाजी दिन शुरू होते ही इसकी कमाई आधी से भी कम होकर ₹65 लाख पर आ गिरी। इसके बाद मंगलवार को भी फिल्म ने किसी तरह ₹65 लाख का बिजनेस किया, जबकि बुधवार को यह ग्राफ और गिरकर ₹55 लाख तथा गुरुवार को महज ₹45 लाख पर सिमट गया।
इतने बड़े और संवेदनशील विषय पर बनने के बावजूद फिल्म का पहले हफ्ते में ही इस कदर औंधे मुंह गिर जाना यह साफ संकेत देता है कि बॉक्स ऑफिस पर इसका सफर अब लगभग खत्म हो चुका है।
फिल्म समीक्षकों और ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी धीमी रफ्तार और सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी कमी को देखते हुए अब आने वाले दूसरे हफ्ते में इस फिल्म से किसी भी तरह की वापसी या चमत्कार की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी होगा। ‘भारत भाग्य विधाता’ का यह हश्र कंगना रनौत की पिछली कुछ फिल्मों की तरह ही बॉक्स ऑफिस पर एक बहुत बड़ी आर्थिक नाकामी के रूप में दर्ज हो चुका है।
