तृणमूल कांग्रेस में अब तक की सबसे बड़ी बगावत! 20 लोकसभा सांसदों ने थामा NDA का हाथ, यूसुफ पठान पर भड़कीं महुआ मोइत्रा

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान पर निशाना साधते हुए उन पर बागी खेमे का साथ देने का आरोप लगाया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों के अलग गुट बनाने की चर्चा तेज है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) वर्ष 1998 में अपने गठन के बाद से अब तक के सबसे बड़े और गहरे राजनीतिक संकट से जूझ रही है। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों के अलग होकर एक नया गुट बनाने के कुछ ही घंटों बाद कृष्णानगर से टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बहरामपुर के सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान की कड़ी आलोचना की। महुआ मोइत्रा ने पठान पर पार्टी के बागी धड़े का साथ देने का आरोप लगाया है।

यह विवाद तब और गहरा गया जब बागी सांसदों में से एक, काकोली घोष ने यह दावा कर दिया कि एनडीए (NDA) का समर्थन करने वाले 20 बागी सांसदों की सूची में यूसुफ पठान का नाम भी शामिल है। इस दावे के बाद महुआ मोइत्रा ने क्रिकेटर से राजनेता बने पठान पर निशाना साधा। उन्होंने कथित तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बुलाए जाने के बाद पठान के तुरंत नई दिल्ली रवाना होने की जल्दबाजी पर गंभीर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर महुआ ने लिखा कि हमारे जिले ने आपको भारी बहुमत से जिताया है, इसलिए थोड़ी शर्म करो और थोड़ा साहस दिखाओ। महुआ मोइत्रा इस पूरे संकट में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ी नजर आ रही हैं। उन्होंने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें पूरी तरह से बेकार करार दिया, जो केवल ममता बनर्जी के राजनीतिक करिश्मे के दम पर टिके हुए थे।

यूसुफ पठान पिछले कुछ दिनों से लगातार सियासी चर्चाओं के केंद्र में बने हुए हैं। हाल ही में एक बंगाली दैनिक समाचार पत्र ने रिपोर्ट दी थी कि टीएमसी ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के माध्यम से यूसुफ पठान से बहरामपुर सांसद पद से इस्तीफा देने का आग्रह किया था, ताकि उस सीट पर उपचुनाव कराकर ममता बनर्जी के लिए संसद पहुंचने का रास्ता साफ किया जा सके। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पठान ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह ठुकरा दिया था। रणनीतिक रूप से टीएमसी बहरामपुर को ममता बनर्जी के लिए एक बेहद सुरक्षित क्षेत्र मानती थी, क्योंकि वहां लगभग 50 से 52 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं, जो पार्टी का मुख्य आधार रहे हैं। हालांकि, सौरव गांगुली और स्वयं यूसुफ पठान ने इन खबरों को पूरी तरह से भ्रामक और गलत बताते हुए खारिज कर दिया था। गौरतलब है कि पठान ने 2024 के आम चुनाव में कांग्रेस के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी को शिकस्त दी थी और वे बहरामपुर से चुनाव जीतने वाले टीएमसी के इतिहास के पहले उम्मीदवार बने थे।

महुआ मोइत्रा की यह ताजा टिप्पणी लोकसभा के मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र सौंपकर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का ऐलान करने के बाद आई है। बागी खेमे से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ये सांसद फिलहाल औपचारिक रूप से टीएमसी से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं और न ही तुरंत भाजपा की सदस्यता ले रहे हैं। इसके बजाय, वे दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए संसद में एक स्वतंत्र समूह के रूप में कार्य करते हुए एनडीए को समर्थन देंगे।

संसदीय दल में मची इस रार से कुछ दिन पहले ही टीएमसी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने विधानसभा में 60 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए एक आधिकारिक पत्र प्रस्तुत किया था। इस पत्र पर 58 विधायकों के हस्ताक्षर थे, जिसमें नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए ऋतब्रत के नाम की पैरवी की गई थी। इस कदम को सीधे तौर पर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। ऋतब्रत ने अभिषेक बनर्जी पर पार्टी को एक जन आंदोलन के बजाय कॉर्पोरेट संस्था की तरह संचालित करने का आरोप लगाया है। 60 विधायकों के इस आंकड़े के साथ बागी गुट ने दलबदल विरोधी कानून के तहत जरूरी दो-तिहाई बहुमत की सीमा को आसानी से पार कर लिया है, जिससे भविष्य में उनके लिए टीएमसी के मूल चुनाव चिन्ह पर भी दावा ठोकने का रास्ता साफ हो सकता है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 Breaking News Wale - Latest Hindi News by Breaking News Wale