Annamalai Resignation: तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने के फैसले से संगठन में हलचल मच गई है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने उनके इस्तीफे पर तुरंत अंतिम निर्णय लेने के बजाय कुछ समय लेने का फैसला किया है और उन्हें रोकने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह अन्नामलाई ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन तथा संगठन महासचिव बीएल संतोष से मुलाकात की। इसके बाद दिन में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी अलग से बातचीत की। बताया जाता है कि बीएल संतोष को अन्नामलाई का राजनीतिक मार्गदर्शक माना जाता है।
इन बैठकों के दौरान अन्नामलाई ने शांत और सौहार्दपूर्ण माहौल में पार्टी छोड़ने की इच्छा व्यक्त की। हालांकि उन्होंने यह संकेत भी दिया कि भविष्य में यदि जरूरत हुई तो वे पार्टी के साथ सहयोग करने के लिए तैयार रह सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जब वे दिल्ली एयरपोर्ट से चेन्नई जाने के लिए निकलने वाले थे, उसी समय पार्टी नेतृत्व ने फोन कर उन्हें फिर से चर्चा के लिए बुलाया। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि वे अपने इस्तीफे के निर्णय पर दोबारा विचार करें।
बताया जा रहा है कि अन्नामलाई ने दो विकल्प रखे हैं—पहला, उन्हें कम से कम सात साल के लिए पूरी स्वायत्तता के साथ फिर से तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष बनाया जाए, या फिर उन्हें अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने की अनुमति दी जाए।
सूत्र यह भी बताते हैं कि अन्नामलाई तमिलनाडु में नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। उनका मानना है कि मौजूदा राजनीतिक स्थिति में किसी राष्ट्रीय दल के लिए राज्य में सीमित संभावनाएं हैं, जबकि क्षेत्रीय पार्टी ज्यादा प्रभावी विकल्प हो सकती है।
हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में डीएमके और अन्नाद्रमुक (AIADMK) जैसी बड़ी द्रविड़ पार्टियों को हार का सामना करना पड़ा, जबकि थलपति विजय की नई पार्टी टीवीके ने चुनाव में जीत दर्ज कर सरकार बनाई, जिसे कांग्रेस समेत कई दलों का समर्थन मिला।
अन्नामलाई का यह भी मानना है कि 2021 से 2025 तक उनके कार्यकाल में तमिलनाडु में भाजपा की उपस्थिति और पहचान में काफी बढ़ोतरी हुई। केंद्रीय नेतृत्व भी उनके कामकाज और संगठनात्मक सक्रियता की सराहना करता रहा है।
