Hamirpur Bridge Collapse: उत्तर प्रदेश में गुरुवार देर रात आए भीषण आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच हमीरपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और बड़ा हादसा सामने आया है, जहाँ बेतवा नदी पर बन रहा एक बड़ा निर्माणाधीन पुल अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस भीषण हादसे में अब तक छह मजदूरों की मलबे में दबने से मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के पिलरों और मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंच गए हैं और बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
यह पूरी घटना हमीरपुर के ललपुरा क्षेत्र की है, जहाँ मोराकांदर परसनी से कुरारा के नैठी और कंडौर गांव के बीच बेतवा नदी पर लगभग एक किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। गुरुवार देर रात करीब दो बजे जब पूरा इलाका तेज आंधी और मूसलाधार बारिश की चपेट में था, तभी इस निर्माणाधीन पुल का एक भारी-भरकम स्लैब अचानक भरभरा कर नीचे गिर गया। बदकिस्मती से उस वक्त पुल के निर्माण कार्य में लगे कई मजदूर और कर्मचारी इसी स्लैब के नीचे सो रहे थे, जिसके कारण वे सभी मलबे के नीचे जिंदा दफन हो गए।
इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले छह लोगों की पहचान कर ली गई है। मृतकों में बांदा जिले के चिल्ला थाना अंतर्गत रहने वाले बाईस वर्षीय लोकेंद्र निषाद और उन्नीस वर्षीय कुलदीप निषाद, बांदा के ही भूरागढ़ निवासी अट्ठाईस वर्षीय सावंत यादव और तीस वर्षीय सभाजीत शामिल हैं। इसके अलावा हमीरपुर के ललपुरा थाना क्षेत्र के रहने वाले चौंतीस वर्षीय पुष्पेंद्र सिंह चौहान और बयालीस वर्षीय राजेश पाल ने भी इस हादसे में अपनी जान गंवाई है। दूसरी तरफ, पुल के पिलर और खंभों के बीच बांदा के रहने वाले अवधेश निषाद, कल्लू यादव और राजेश निषाद अभी भी फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बेहद सावधानी से रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हमीरपुर के एडिशनल एसपी अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि २८ और २९ मई की मध्यरात्रि करीब दो बजे पुलिस को पुल का स्लैब गिरने और उसके नीचे लोगों के दबने की सूचना मिली थी। इसके तुरंत बाद स्थानीय पुलिस और जिले के आला अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंच गए। वर्तमान में एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें क्रेन व आधुनिक उपकरणों की मदद से भारी स्लैब को हटाने और खंभों पर फंसे तीन लोगों को सुरक्षित नीचे उतारने के काम में लगातार जुटी हुई हैं।
गौरतलब है कि राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद के विशेष प्रयासों के बाद स्वीकृत हुए इस पुल का निर्माण क्षेत्र के विकास के लिए कराया जा रहा था। लेकिन इस भीषण हादसे के बाद अब पुल के निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का पूरा ध्यान फिलहाल मलबे में फंसे लोगों की जान बचाने पर केंद्रित है।
