चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त बड़ा सस्पेंस बना हुआ है। थलापति विजय की पार्टी टीवीके को अब तक सरकार बनाने का औपचारिक मौका नहीं मिला है, क्योंकि राज्यपाल का कहना है कि पहले उसे स्पष्ट बहुमत साबित करना होगा। इस बीच विजय दो बार राज्यपाल से मिल चुके हैं, लेकिन दोनों बार उन्हें निराशा ही मिली है।
राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म इसलिए हो गया है क्योंकि चर्चा यह भी है कि डीएमके और एआईएडीएमके के बीच किसी तरह की समझ या गठबंधन की संभावना पर बातचीत चल रही है। इसी आशंका के बीच टीवीके ने बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है। पार्टी का कहना है कि अगर डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करते हैं और टीवीके को बाहर रखा जाता है, तो उसके सभी 107 विधायक इस्तीफा दे देंगे। यह बयान खुद में तमिलनाडु की राजनीति में दबाव बनाने की एक बड़ी रणनीति माना जा रहा है।
टीवीके का दावा है कि वह इस चुनाव में सबसे बड़ी उभरती ताकत बनकर सामने आई है और इसलिए सरकार बनाने का पहला अधिकार उसे मिलना चाहिए। हालांकि राज्यपाल ने इस दावे को यह कहते हुए स्वीकार नहीं किया कि अभी पार्टी के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार राज्यपाल ने समर्थन पत्रों के जरिए बहुमत साबित करने की शर्त भी रखी है, जिस पर विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि कई नेता मानते हैं कि बहुमत विधानसभा के फ्लोर पर साबित होता है, न कि राजभवन में।
उधर पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने संकेत दिया है कि टीवीके को काम करने के लिए समय और स्थिर माहौल दिया जाना चाहिए, ताकि राज्य में कोई संवैधानिक संकट न पैदा हो। उन्होंने फिलहाल किसी भी तरह के जल्द चुनाव या बड़े राजनीतिक टकराव की संभावना से इनकार किया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में अभी भी अटकलें तेज हैं कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की सत्ता की तस्वीर और बदल सकती है।
