कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 15 साल के तृणमूल कांग्रेस (TMC) शासन के अंत के साथ ही अब नई सरकार के गठन की संवैधानिक प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने राज्यपाल आर. एन. रवि से मुलाकात कर नवनिर्वाचित उम्मीदवारों की आधिकारिक गजट अधिसूचना सौंप दी है। 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 206 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की है, जिसके बाद राज्यपाल अब बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने की तैयारी में हैं। संविधान के नियमों के अनुसार, मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 6 मई की मध्यरात्रि को समाप्त हो गया है, जिससे सदन स्वतः ही भंग माना जा रहा है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी हार को स्वीकार करने के बजाय तीखा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी और विधानसभा चुनाव के इन परिणामों को अदालत में चुनौती देंगी। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कालीघाट में पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ एक लंबी बैठक की, जिसमें उन्होंने ईवीएम में छेड़छाड़ और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। ममता बनर्जी का कहना है कि वे इस लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली के राजनीतिक गलियारों तक ले जाएंगी। उन्होंने अपने विधायकों को सतर्क रहने और चुनाव के बाद होने वाली हिंसा पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
राजभवन के सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल के पास अब कई संवैधानिक विकल्प मौजूद हैं। यदि मौजूदा मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल नई सरकार के शपथ ग्रहण तक एक कार्यवाहक सरकार नियुक्त कर सकते हैं या फिर कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश भी कर सकते हैं। बीजेपी की ओर से विधायक दल का नेता चुनने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस प्रक्रिया के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। उनके कोलकाता पहुंचने के बाद बीजेपी के सभी विधायक अपना नेता चुनेंगे और शनिवार तक नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होने की पूरी संभावना है।
बीजेपी ने अपनी जीत के साथ ही बंगाल के लिए अपना एजेंडा भी साफ कर दिया है। पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने, महिलाओं को प्रतिमाह 3000 रुपये की आर्थिक सहायता देने और सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने जैसे बड़े वादे किए हैं। इसके अलावा, सातवां वेतन आयोग लागू करना और बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ को रोकना भी नई सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। फिलहाल पूरा बंगाल इस ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव और आने वाले शपथ ग्रहण समारोह की प्रतीक्षा कर रहा है।
