पब्लिक वाई-फाई के लिए अब बार-बार OTP का झंझट खत्म: देशभर में चलेगा एक ही पासवर्ड, TRAI ने पेश किया नया मॉडल

सरकार पीएम-वाणी योजना के अनुभवों और उसकी सीमाओं से सीख लेते हुए देश में एक नया और उन्नत पब्लिक वाई-फाई सिस्टम लाने की तैयारी कर रही है। इस नई व्यवस्था का मकसद यूजर्स को बेहतर इंटरनेट अनुभव देना, लॉगिन प्रक्रिया को आसान बनाना और डिजिटल भुगतान को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाना है।

पूरे देश में Public Wi-Fi का एक ही पासवर्ड (Image: ChatGPT)
पूरे देश में Public Wi-Fi का एक ही पासवर्ड (Image: ChatGPT)

One Password for All Public Wi-Fi: भारत सरकार देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी का परिदृश्य बदलने के लिए एक नई और उन्नत ‘पब्लिक वाई-फाई’ प्रणाली लाने की तैयारी कर रही है। मौजूदा पीएम-वाणी (PM-WANI) योजना की सीमाओं से सीखते हुए, इस नई व्यवस्था को अधिक यूजर-फ्रेंडली और सुरक्षित बनाया जाएगा। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने इस संबंध में एक परामर्श पत्र जारी किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य देशभर में फैले करीब 4 लाख वाई-फाई हॉटस्पॉट के बीच एक सहज नेटवर्क तैयार करना है।

इस नई प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसका लॉगिन अनुभव होगा। वर्तमान में यूजर्स को हर अलग हॉटस्पॉट पर जाकर अलग-अलग ओटीपी (OTP) दर्ज करना पड़ता है, जो काफी असुविधाजनक होता है। नई व्यवस्था के तहत, अब देशभर के लाखों हॉटस्पॉट पर केवल एक ही ओटीपी या पासवर्ड के माध्यम से लॉगिन किया जा सकेगा। इससे यूजर्स को बार-बार की प्रमाणीकरण प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी और वे बिना किसी रुकावट के इंटरनेट का उपयोग कर सकेंगे।

सुरक्षा के मोर्चे पर भी सरकार बड़े बदलाव करने जा रही है। सार्वजनिक वाई-फाई को सुरक्षित बनाने के लिए ‘वाई-फाई प्रोटेक्टेड एक्सेस 3’ (WPA3) जैसे आधुनिक मानक लागू किए जाएंगे। यह तकनीक भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी यूपीआई (UPI) और डिजिटल पेमेंट को अधिक सुरक्षित बनाएगी, जिससे साइबर धोखाधड़ी का जोखिम काफी कम हो जाएगा।

ट्राई के परामर्श पत्र में इस बात को स्वीकार किया गया है कि मौजूदा वाई-फाई सिस्टम ऑपरेटरों के लिए आय का जरिया नहीं बन पाया, जिससे इसकी सफलता सीमित रही। इसलिए नए मॉडल में कमाई (रेवेन्यू) पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें विज्ञापन-आधारित मॉडल, पेड इंटरनेट प्लान और सरकारी सब्सिडी (वायबिलिटी गैप फंडिंग) जैसे विकल्पों का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि छोटे और बड़े ऑपरेटरों को इस क्षेत्र में निवेश करने का प्रोत्साहन मिल सके।

विस्तार की योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पर ध्यान दिया जाएगा, जबकि ग्रामीण इलाकों के लिए कम लागत वाला ‘कम्युनिटी वाई-फाई’ मॉडल अपनाया जाएगा। वर्तमान में भारत की 140 करोड़ की आबादी में से केवल 2 प्रतिशत लोग ही पब्लिक वाई-फाई का उपयोग करते हैं। तुलनात्मक रूप से देखें तो दक्षिण कोरिया में यह आंकड़ा 80 प्रतिशत और अमेरिका में 70 प्रतिशत है। सरकार का लक्ष्य भारत को भी वैश्विक मानकों के करीब ले जाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल इंटरनेट की पहुंच को आसान बनाएगी, बल्कि मोबाइल नेटवर्क पर बढ़ते डेटा ट्रैफिक के दबाव को भी कम करेगी। बीएसएनएल के पूर्व चेयरमैन के अनुसार, सस्ता इंटरनेट उपलब्ध होने से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी। वाई-फाई का यह नेटवर्क विशेष रूप से वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड सेवाओं और एआई आधारित टूल्स के लिए एक बेहतर विकल्प साबित होगा, जिससे आम नागरिकों के लिए ई-गवर्नेंस सेवाओं का लाभ उठाना और भी सुलभ हो जाएगा।

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