महमूद नबावियन का बड़ा बयान: ‘पाकिस्तान में अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर चर्चा करना ईरान की रणनीतिक गलती थी’

अमेरिका और इजरायल के बीच जंग भले थम गई हो, लेकिन क्षेत्रीय हालात अब भी सामान्य नहीं हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से नाकेबंदी जारी है, जिससे तनाव बना हुआ है। इसी बीच महमूद नबावियन ने पाकिस्तान में अमेरिका के साथ हुई बातचीत को ‘रणनीतिक गलती’ करार दिया है।

ईरानी सांसद महमूद नबावियन बोले- पाकिस्तान में US वार्ता ‘रणनीतिक गलती’
ईरानी सांसद महमूद नबावियन बोले- पाकिस्तान में US वार्ता ‘रणनीतिक गलती’

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध भले ही थम गया हो, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर दोनों देशों की नाकेबंदी के कारण तनाव अभी भी चरम पर है। इस बीच, ईरानी सांसद और पार्लियामेंट की नेशनल सिक्योरिटी व फॉरेन पॉलिसी कमेटी के सदस्य महमूद नबावियन ने पाकिस्तान में अमेरिका के साथ हुई हालिया बैठक को एक ‘रणनीतिक गलती’ करार दिया है।

नबावियन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान में अपने परमाणु मुद्दे को बातचीत की मेज पर रखना ईरान के लिए गलत फैसला था। उनका मानना है कि इस चर्चा ने दुश्मन को और अधिक साहसी बना दिया है। उनके अनुसार, अमेरिका ने मांग रखी थी कि ईरान अपने 60 प्रतिशत संवर्धित (Enriched) मटीरियल को हटा दे और उसे अगले 20 वर्षों के लिए ब्लॉक कर दे, लेकिन ईरान ने इस मांग को पूरी तरह से नकार दिया है।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। ट्रंप ने दावा किया कि उनके पास बातचीत के लिए पर्याप्त समय है, लेकिन ईरान का समय तेजी से निकलता जा रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना समुद्र की गहराई में समा चुकी है, उसकी वायुसेना और रडार प्रणाली नष्ट हो चुकी है और देश के पास अब कोई मजबूत नेतृत्व नहीं बचा है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई डील होती है, तो यह ईरान और पूरी दुनिया के लिए बेहतर होगा।

व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के साथ चल रहे इस संघर्ष में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि पारंपरिक हमलों के जरिए पहले ही ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया जा चुका है, इसलिए अब परमाणु हथियारों की तैनाती का कोई औचित्य नहीं बनता है। फिलहाल, पाकिस्तान में हुई यह बेनतीजा बैठक और दोनों तरफ से आ रही बयानबाजी ने क्षेत्र में शांति की संभावनाओं पर सवालिया निशान लगा दिया है।

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