TMC vs Election Commission: तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के बीच बुधवार को हुई अहम बैठक महज 7 मिनट में ही विवाद में बदल गई। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बुलाई गई इस बैठक में टीएमसी और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
बैठक के दौरान टीएमसी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि माहौल गरमा गया। सूत्रों के मुताबिक, डेरेक ओ’ब्रायन ने बैठक के दौरान ऊंची आवाज में बात करते हुए सीईसी को बीच में ही रोक दिया और उन्हें बोलने नहीं दिया।
मीटिंग में क्या हुआ? (दोनों पक्षों के दावे)
टीएमसी का दावा: “हमें अपमानित कर निकाला गया”
टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने बैठक के बाद मीडिया से कहा कि उन्होंने जैसे ही अधिकारियों के तबादले और निष्पक्ष चुनाव पर सवाल उठाए, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उन्हें “Get Lost” (निकल जाओ) कह दिया। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि उन्हें महज 7 मिनट में बैठक से भगा दिया गया। डेरेक ओब्रायन ने सीईसी को ‘अपराधी’ और ‘चोर’ तक कह डाला और चुनौती दी कि आयोग इस मीटिंग का वीडियो या ऑडियो फुटेज जारी करे।
चुनाव आयोग का पक्ष: “टीएमसी नेताओं ने चिल्लाकर गरिमा तोड़ी”
वहीं, चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि डेरेक ओब्रायन बैठक में बेहद आक्रामक थे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर चिल्लाते हुए उन्हें बोलने से रोका। आयोग के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार ने उनसे शालीनता बनाए रखने का आग्रह किया और कहा कि “चिल्लाना और अभद्र व्यवहार उचित नहीं है।” इसके बाद आयोग ने सोशल मीडिया (X) पर एक ‘स्ट्रेट टॉक’ पोस्ट जारी कर कहा कि बंगाल में इस बार चुनाव “भय, हिंसा, धमकी और बूथ जामिंग” के बिना होकर ही रहेंगे।
चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक
— Election Commission of India (@ECISVEEP) April 8, 2026
पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव:
भय रहित,
हिंसा रहित,
धमकी रहित,
प्रलोभन रहित,
छापा रहित,
बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे
ECI's Straight-talk to Trinamool Congress
This time, the Elections in West Bengal would surely be :… pic.twitter.com/p5fM8Uu337
विवाद की मुख्य जड़: 91 लाख मतदाताओं के नाम कटना
यह पूरी लड़ाई पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) को लेकर है। टीएमसी का आरोप है कि:
- वोटरों की छंटनी: मतदाता सूची से करीब 90.83 लाख (लगभग 91 लाख) नाम हटा दिए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 11.85% है।
- लक्षित कार्रवाई: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप है कि जानबूझकर अल्पसंख्यकों, बंगालियों और गरीबों के नाम काटे गए हैं ताकि उन्हें मतदान से वंचित किया जा सके।
- अधिकारियों का तबादला: टीएमसी ने उन 6 अधिकारियों की सूची भी सौंपी है जिनके बारे में उनका दावा है कि वे बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे हैं।
अगला कदम: विपक्षी दलों की एकजुटता
इस घटना के बाद टीएमसी ने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के अन्य दलों के साथ मिलकर शाम को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। टीएमसी सांसद साकेत गोखले और सागरिका घोष ने भी चुनाव आयोग के व्यवहार को ‘शर्मनाक’ बताया है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे को लेकर फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
