मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2026 की अपनी पहली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के फैसलों की घोषणा कर दी है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी कि केंद्रीय बैंक ने प्रमुख लोन दर यानी रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही बैंक ने अपना नीतिगत रुख भी ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा की मुख्य बातें
मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक और घरेलू आर्थिक स्थितियों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा बाजारों में आने वाली बाधाएं भारत के राजकोषीय घाटे पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, वैश्विक विकास की कमजोर संभावनाओं के कारण बाहरी मांग में कमी आ सकती है और रेमिटेंस का प्रवाह भी कम हो सकता है। गवर्नर ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि बढ़ती अनिश्चितताएं और जोखिम से बचने की बढ़ती प्रवृत्ति घरेलू लिक्विडिटी की स्थितियों पर भी असर डाल सकती है।
रेपो रेट और बैंक ब्याज दरों का गणित
भारत का रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर कमर्शियल बैंक केंद्रीय बैंक से फंड उधार लेते हैं और इसे पूरी तरह से भारतीय रिजर्व बैंक ही कंट्रोल करता है। पिछले साल की शुरुआत में जब RBI ने रेपो रेट कम करना शुरू किया था, तब कई बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरें भी घटा दी थीं। हालांकि, दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 में हुई पिछली दो बैठकों की तरह इस बार भी दरें 5.25% पर ही स्थिर रखी गई हैं। इससे बैंकों को जमा दरों (FD Rates) को बनाए रखने या कुछ मामलों में उन्हें थोड़ा बढ़ाने के लिए राहत मिली है।
आम जनता और परिवारों की बचत पर असर
रेपो रेट में होने वाले किसी भी बदलाव का असर तुरंत दिखाई देता है। जब RBI इसे बढ़ाता है, तो बैंक अक्सर फंड जुटाने के लिए अपनी जमा दरों को बढ़ा देते हैं और जब यह घटता है, तो जमा पर मिलने वाला रिटर्न आमतौर पर कम हो जाता है। यह सीधा तालमेल रेपो रेट और महंगाई को परिवारों की बचत की स्थिरता से जोड़ता है। फिलहाल दरों में कोई बदलाव न होने का मतलब है कि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई में भी किसी बड़ी राहत या बढ़ोतरी की तत्काल संभावना नहीं है।
