पश्चिम एशिया संकट पर प्रधानमंत्री की मुख्यमंत्रियों संग बड़ी बैठक, बोले- ‘एकजुट होकर काम करें’, लॉकडाउन नहीं लगेगा

पश्चिम एशिया संकट को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच एक अहम वर्चुअल बैठक हुई। मध्य पूर्व में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के खतरे को देखते हुए बुलाई गई यह बैठक करीब दो घंटे तक चली।

PM Modi Meets CMs on West Asia Crisis
PM Modi Meets CMs on West Asia Crisis

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के बंद होने के खतरों के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक की। लगभग दो घंटे चली इस उच्च स्तरीय चर्चा में पीएम मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों को ‘टीम इंडिया’ की भावना से काम करना होगा।

लॉकडाउन की अफवाहों पर विराम

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने देशवासियों और राज्यों को आश्वस्त करते हुए कहा कि मौजूदा संकट के कारण देश में कोई लॉकडाउन नहीं लगेगा। उन्होंने अधिकारियों और मुख्यमंत्रियों को निर्देश दिया कि वे सटीक और विश्वसनीय जानकारी का प्रसार करें ताकि गलत सूचनाओं और अफवाहों के कारण जनता में भय का माहौल न बने।

आर्थिक स्थिरता और सप्लाई चेन पर जोर

पीआईबी (PIB) के अनुसार, प्रधानमंत्री ने बैठक में तीन मुख्य प्राथमिकताओं पर जोर दिया:

  1. आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता: वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखना।
  2. एनर्जी सिक्योरिटी: देश में तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना।
  3. नागरिकों के हितों की रक्षा: सप्लाई चेन को मजबूत कर महंगाई पर लगाम लगाना।

पीएम मोदी ने राज्यों से जमाखोरी और मुनाफाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की अपील की। मुख्यमंत्रियों ने भी प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर भरोसा जताया और रिपोर्ट दी कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

बैठक में शामिल हुए दिग्गज नेता

इस वर्चुअल मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। इनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी और छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साय प्रमुख रहे। दक्षिण भारत से चंद्रबाबू नायडू और रेवंत रेड्डी, पंजाब से भगवंत मान, जम्मू-कश्मीर से उमर अब्दुल्ला, झारखंड से हेमंत सोरेन, गुजरात से भूपेंद्र पटेल और महाराष्ट्र से देवेंद्र फडणवीस ने भी अपनी तैयारियों का ब्योरा साझा किया।

हालांकि, पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण इस बैठक का हिस्सा नहीं बन सके।

कोरोना काल जैसी एकजुटता की अपील

प्रधानमंत्री ने वर्तमान स्थिति की तुलना 2020 की कोरोना महामारी से करते हुए कहा कि जिस तरह कोविड-19 के दौरान देश ने राजनीति से ऊपर उठकर एक परिवार की तरह लड़ाई लड़ी थी, आज फिर उसी जज्बे की जरूरत है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे वैक्सीनेशन के दौर में केंद्र ने 18 साल से ऊपर के सभी नागरिकों को मुफ्त वैक्सीन देकर राज्यों का बोझ कम किया था। पीएम ने आगाह किया कि मिडिल ईस्ट का संकट लंबा खिंच सकता है, इसलिए जमीनी स्तर पर योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों की है ताकि आम आदमी की रसोई तक इस युद्ध की लपटें न पहुंचें।

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