Petrol Diesel Price: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और ईरान में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में ‘भूकंप’ जैसी स्थिति है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जुलाई 2022 के बाद पहली बार 111 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर गई हैं। इसके बावजूद, भारतीय तेल कंपनियों ने आज, 9 मार्च को घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जो आम जनता के लिए राहत की बात है।
ब्रेंट क्रूड में 20% की ऐतिहासिक तेजी
पिछले एक हफ्ते में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो अब 111.04 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी 22% का उछाल देखा गया है। कीमतों में इस ‘आग’ की मुख्य वजह हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शिपिंग का पूरी तरह ठप होना है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी पतले समुद्री रास्ते से गुजरता है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इस मार्ग के बंद होने से कुवैत, यूएई और इराक जैसे बड़े उत्पादकों को अपना उत्पादन कम करना पड़ा है क्योंकि उनकी स्टोरेज क्षमता फुल हो चुकी है।
भारतीय शहरों में आज का भाव (रुपये प्रति लीटर):
स्थानीय टैक्स और वैट (VAT) के कारण अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग-अलग बनी हुई हैं। दिल्ली और लखनऊ वर्तमान में सबसे सस्ते बाजार हैं, जबकि हैदराबाद में कीमतें सबसे ऊंचे स्तर पर हैं।
| शहर | पेट्रोल की कीमत | डीजल की कीमत |
| नई दिल्ली | 94.77 | 87.67 |
| लखनऊ | 94.69 | 87.81 |
| मुंबई | 103.54 | 90.03 |
| बेंगलुरु | 102.99 | 91.06 |
| चेन्नई | 101.06 | 92.61 |
| कोलकाता | 105.45 | 92.02 |
| जयपुर | 105.40 | 90.82 |
| पटना | 105.42 | 91.67 |
| हैदराबाद | 107.46 | 95.70 |
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों के आसमान छूने के पीछे तीन बड़े कारण हैं:
- उत्पादन में कटौती: होर्मुज में रुकावट के कारण भंडारण भरने से प्रमुख खाड़ी देशों ने प्रोडक्शन घटा दिया है।
- सप्लाई चेन ठप: समुद्री रास्ता बंद होने से क्रूड और नेचुरल गैस की सप्लाई दुनिया भर में बाधित हो गई है।
- अमेरिकी हस्तक्षेप: खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दखल ने बाजार में अनिश्चितता और अस्थिरता पैदा कर दी है।
हालांकि, भारत के लिए राहत की खबर यह है कि अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दी है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को कुछ हद तक सस्ता कच्चा तेल मिल पा रहा है। लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड इसी तरह 110 डॉलर के ऊपर बना रहा, तो आने वाले दिनों में घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ सकता है।
