अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ीं मुश्किलें: मेडिकल रिपोर्ट में बटुकों से कुकर्म की पुष्टि, गिरफ्तारी की तलवार लटकी

Swami Avimukteshwaranand: नाबालिग बटुकों के यौन शोषण के गंभीर आरोपों में घिरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें अब और बढ़ती नजर आ रही हैं। मामले की जांच कर रही पुलिस को पीड़ित बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट मिल गई है, जिसमें उनके साथ कुकर्म किए जाने की पुष्टि हुई है।

नाबालिग बटुकों के यौन शोषण के गंभीर आरोपों में घिरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें अब और बढ़ती नजर आ रही हैं। मामले की जांच कर रही पुलिस को पीड़ित बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट मिल गई है, जिसमें उनके साथ कुकर्म किए जाने की पुष्टि हुई है। बुधवार को कराए गए इस मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट अब इस मामले में सबसे अहम कड़ी बन गई है, जिससे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कानूनी शिकंजा और कसना तय माना जा रहा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में कल होगी सुनवाई

गिरफ्तारी के डर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली है। उन्होंने अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए याचिका दाखिल की है, जिस पर जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच शुक्रवार को सुनवाई करेगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि पुलिस अदालत में मेडिकल रिपोर्ट पेश करेगी, जिससे स्वामी को बड़ा झटका लग सकता है। यदि हाईकोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिलती है, तो पुलिस उन्हें किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब आशुतोष ब्रह्मचारी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और तीन अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ दो नाबालिग बटुकों के यौन शोषण का आरोप लगाया। जिला अदालत के आदेश पर प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। विवेचना के दौरान इस मामले में अरविंद मिश्रा और प्रकाश उपाध्याय जैसे अन्य नामों का भी खुलासा हुआ है।

एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई शुरू की है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने पहले ही दावा किया था कि बच्चों के साथ गलत काम हुआ है, जिसकी अब मेडिकल साइंस ने भी पुष्टि कर दी है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष: ‘यह सरकारी साजिश है’

दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सरकार की एक गहरी साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि वे जांच में पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। स्वामी ने मांग की है कि चूंकि उन्हें यूपी पुलिस पर भरोसा नहीं है, इसलिए इस पूरे मामले की जांच किसी दूसरे राज्य की पुलिस एजेंसी से करवाई जानी चाहिए।

फिलहाल, सबकी नजरें कल होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि स्वामी को राहत मिलेगी या जेल।

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