US Investment in Balochistan: पाकिस्तान का बलूचिस्तान लंबे समय से अपनी बंजर जमीन के नीचे छिपे अपार खनिज भंडारों की वजह से चर्चा में रहा है। सोना, तांबा और रेयर अर्थ मिनरल्स से भरपूर यह इलाका दुनिया के सबसे समृद्ध खनिज क्षेत्रों में गिना जाता है। अब इसी बलूचिस्तान पर अमेरिका की नजर टिक गई है। चीन के बाद अब अमेरिका भी यहां बड़े पैमाने पर निवेश करने जा रहा है।
अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित दुनिया के सबसे बड़े सोना-तांबा भंडार ‘रेको डीक माइन’ में 1.3 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है। यह निवेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए नए प्रोजेक्ट ‘वॉल्ट’ का हिस्सा है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट अहम खनिजों और रेयर अर्थ मिनरल्स के वैश्विक बाजार को नया आकार देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
रेको डीक खदान बलूचिस्तान के चागई जिले में स्थित है और इसे दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड-कॉपर डिपॉजिट माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 5.9 बिलियन टन अयस्क मौजूद है, जिसमें लगभग 0.41 प्रतिशत तांबा और 41.5 मिलियन औंस सोने का भंडार होने का अनुमान है। यह इलाका चागई पहाड़ियों में आता है, जो एक ज्वालामुखीय श्रृंखला का हिस्सा है और अफगानिस्तान की सीमा तक फैली हुई है।
अमेरिकी विदेश विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, रेको डीक ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के तहत अमेरिका के बाहर किया गया इकलौता निवेश है। इस परियोजना की घोषणा 2 फरवरी 2026 को डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। यह पहल यूनाइटेड स्टेट्स एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) के नेतृत्व में शुरू की गई है, जिसका मकसद अमेरिका के लिए रणनीतिक क्रिटिकल मिनरल्स का भंडार तैयार करना है।
दरअसल, ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ का सबसे बड़ा उद्देश्य चीन पर रेयर अर्थ मिनरल्स के मामले में निर्भरता कम करना है। अभी चीन इन मिनरल्स की वैश्विक सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ रखता है, जबकि तांबा, सोना और रेयर अर्थ्स डिफेंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और एडवांस टेक्नोलॉजी के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। इसी वजह से अमेरिका इस सेक्टर में आक्रामक रणनीति अपना रहा है। EXIM बैंक ने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 10 अरब डॉलर के लोन को मंजूरी दी है और कुल 12 अरब डॉलर की योजना के तहत अमेरिका के भीतर कई माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा है। इनमें इकलौता विदेशी निवेश पाकिस्तान का रेको डीक प्रोजेक्ट है।
हालांकि, रेको डीक को लेकर विवाद भी रहा है। साल 2011 में पाकिस्तान सरकार ने चिली की एंटोफागास्टा और कनाडा की बैरिक गोल्ड की संयुक्त कंपनी टेथियन कॉपर को माइनिंग राइट्स देने से इनकार कर दिया था। यह मामला बाद में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत तक पहुंचा। अब बैरिक गोल्ड एक बार फिर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, लेकिन बलूचिस्तान में हाल के सुरक्षा हालात और अलगाववादी गतिविधियों के चलते कंपनी ने पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा शुरू कर दी है। इसके बावजूद अमेरिका का 1.3 अरब डॉलर का निवेश आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
कुल मिलाकर, अमेरिका का बलूचिस्तान में यह कदम सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी माना जा रहा है। चीन को टक्कर देने, क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई सुरक्षित करने और ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अमेरिका ने जोखिम भरे इस क्षेत्र में बड़ा दांव लगाया है। ऐसे में बलूचिस्तान की धरती एक बार फिर वैश्विक ताकतों के बीच प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनती दिख रही है।
