अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच जुबानी जंग अब एक बेहद गंभीर कूटनीतिक संकट में बदल गई है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अपने प्रस्तावित मिसाइल डिफेंस सिस्टम ‘गोल्डन डोम’ का विरोध करने पर कनाडा पर तीखा हमला बोला है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि कनाडा इस महत्वाकांक्षी परियोजना के खिलाफ है, जबकि यह सिस्टम स्वाभाविक रूप से कनाडा की भी रक्षा करेगा। ट्रंप ने आरोप लगाया कि कनाडा ने सुरक्षा के बजाय चीन के साथ व्यापारिक समझौतों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में लिखा कि चीन आने वाले एक साल के भीतर ही कनाडा को “खा जाएगा”। यह विवाद तब और गहरा गया जब कनाडाई प्रधानमंत्री ने हाल ही में बीजिंग का दौरा कर चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों और कृषि उत्पादों पर नए व्यापारिक समझौतों को अंतिम रूप दिया।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (दावोस 2026) के दौरान ट्रंप ने कनाडा को लेकर बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि कनाडा अमेरिका की वजह से ही सुरक्षित और “जिंदा” है। ट्रंप का तर्क है कि कनाडा को अमेरिका से सुरक्षा सहित कई चीजें मुफ्त में मिलती हैं, जिसके लिए उन्हें आभारी होना चाहिए।
ट्रंप की इस टिप्पणी पर कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है। कार्नी ने क्यूबेक सिटी में आयोजित एक कैबिनेट बैठक के दौरान पलटवार करते हुए कहा कि कनाडा अमेरिका की वजह से नहीं, बल्कि अपनी ताकत और कनाडाई पहचान के दम पर फल-फूल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा एक संप्रभु राष्ट्र है और वह किसी भी अन्य शक्ति के अधीन नहीं है।
दोनों देशों के बीच तनाव का स्तर इस बात से समझा जा सकता है कि ट्रंप ने मार्क कार्नी को अपने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के निमंत्रण से भी बाहर कर दिया है। इससे पहले ट्रंप कई बार कनाडा को अमेरिका का ’51वां राज्य’ बनाने की बात कह चुके हैं और हाल ही में उन्होंने एक एआई-जनरेटेड नक्शा साझा किया था जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को अमेरिकी झंडे के नीचे दिखाया गया था। कनाडा के संयुक्त राष्ट्र राजदूत बॉब राय ने ट्रंप की इस ‘गोल्डन डोम’ योजना को सुरक्षा देने के नाम पर चलाया जा रहा एक ‘प्रोटेक्शन रैकेट’ करार दिया है।
‘गोल्डन डोम’ परियोजना वास्तव में ट्रंप का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो इजरायल के ‘आयरन डोम’ का एक विशाल और आधुनिक अंतरिक्ष-आधारित संस्करण माना जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत करीब 175 अरब डॉलर बताई जा रही है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक खर्च इससे कहीं अधिक हो सकता है। ट्रंप का मानना है कि 2029 तक इस सिस्टम को लागू करने के लिए ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाना अनिवार्य है। दूसरी ओर, कनाडा और यूरोपीय सहयोगियों का मानना है कि यह अमेरिका की विस्तारवादी नीति का हिस्सा है जो वैश्विक सुरक्षा ढांचे और देशों की संप्रभुता को खतरे में डाल रहा है।
