ब्रिटेन की सियासत में ऐतिहासिक मोड़, कश्मीर मूल की शबाना महमूद बन सकती हैं देश की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री

ब्रिटेन की राजनीति इस वक्त एक बड़े बवंडर के बीच फंसी नजर आ रही है। एपस्टीन फाइल्स से जुड़े हालिया खुलासों ने लेबर पार्टी की सरकार में ऐसी अस्थिरता पैदा कर दी है कि पिछले पांच वर्षों में पांच प्रधानमंत्री देख चुके इस देश में अब कीर स्टॉर्मर के इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री के कम्युनिकेशन डायरेक्टर टिम एलन के इस्तीफे और उससे पहले 8 फरवरी को चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी के पद छोड़ने के बाद यह माना जा रहा है कि स्टॉर्मर सरकार अंदरूनी कलह और दबाव से बिखर रही है।

कीर स्टॉर्मर पर बढ़ते इस्तीफे के दबाव के बीच देश के अगले संभावित प्रधानमंत्री के रूप में होम सेक्रेटरी (गृह मंत्री) शबाना महमूद का नाम सबसे प्रमुखता से उभर कर सामने आया है। लेबर पार्टी की वरिष्ठ नेता शबाना महमूद अगर प्रधानमंत्री चुनी जाती हैं, तो वे ब्रिटेन के इतिहास की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी। पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के मीरपुर से ताल्लुक रखने वाली शबाना को स्टॉर्मर की बेहद भरोसेमंद और अनुभवी सहयोगी माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि एक प्रवासी परिवार की बेटी होने के बावजूद वे इमिग्रेशन के मुद्दे पर बेहद सख्त और ‘हार्डलाइनर’ रुख रखने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने बॉर्डर कंट्रोल को मजबूत करने और स्थायी निवास (PR) की अवधि को 5 से बढ़ाकर 10 साल करने जैसे कड़े कदम उठाए हैं, जिसकी वजह से उन्हें पार्टी के दक्षिणपंथी गुट का भी भरपूर समर्थन हासिल है।

शबाना महमूद के अलावा प्रधानमंत्री की दौड़ में कई अन्य कद्दावर नाम भी शामिल हैं। पूर्व डिप्टी पीएम एंजेला रेनर अपनी लोकप्रियता के कारण मजबूत दावेदार हैं, वहीं हेल्थ सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग अपनी बेहतरीन संवाद शैली और मजबूत मीडिया छवि के कारण चर्चा में हैं। इनके अलावा ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड और मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहम के नामों पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि मिलिबैंड का संसद सदस्य न होना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

ब्रिटिश राजनीति के जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर की गिरती अप्रूवल रेटिंग और पीटर मैंडेलसन जैसे विवादों ने लेबर पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग को हवा दे दी है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्या ब्रिटेन एक बार फिर सत्ता परिवर्तन का गवाह बनेगा और क्या शबाना महमूद के रूप में देश को अपनी पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री मिलेगी। फिलहाल लंदन के सियासी गलियारों में इस्तीफों का दौर जारी है और अनिश्चितता का माहौल गहराता जा रहा है।

ब्रिटेन की राजनीति इस वक्त एक बड़े बवंडर के बीच फंसी नजर आ रही है। एपस्टीन फाइल्स से जुड़े हालिया खुलासों ने लेबर पार्टी की सरकार में ऐसी अस्थिरता पैदा कर दी है कि पिछले पांच वर्षों में पांच प्रधानमंत्री देख चुके इस देश में अब कीर स्टॉर्मर के इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री के कम्युनिकेशन डायरेक्टर टिम एलन के इस्तीफे और उससे पहले 8 फरवरी को चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी के पद छोड़ने के बाद यह माना जा रहा है कि स्टॉर्मर सरकार अंदरूनी कलह और दबाव से बिखर रही है।

कीर स्टॉर्मर पर बढ़ते इस्तीफे के दबाव के बीच देश के अगले संभावित प्रधानमंत्री के रूप में होम सेक्रेटरी (गृह मंत्री) शबाना महमूद का नाम सबसे प्रमुखता से उभर कर सामने आया है। लेबर पार्टी की वरिष्ठ नेता शबाना महमूद अगर प्रधानमंत्री चुनी जाती हैं, तो वे ब्रिटेन के इतिहास की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी। पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के मीरपुर से ताल्लुक रखने वाली शबाना को स्टॉर्मर की बेहद भरोसेमंद और अनुभवी सहयोगी माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि एक प्रवासी परिवार की बेटी होने के बावजूद वे इमिग्रेशन के मुद्दे पर बेहद सख्त और ‘हार्डलाइनर’ रुख रखने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने बॉर्डर कंट्रोल को मजबूत करने और स्थायी निवास (PR) की अवधि को 5 से बढ़ाकर 10 साल करने जैसे कड़े कदम उठाए हैं, जिसकी वजह से उन्हें पार्टी के दक्षिणपंथी गुट का भी भरपूर समर्थन हासिल है।

शबाना महमूद के अलावा प्रधानमंत्री की दौड़ में कई अन्य कद्दावर नाम भी शामिल हैं। पूर्व डिप्टी पीएम एंजेला रेनर अपनी लोकप्रियता के कारण मजबूत दावेदार हैं, वहीं हेल्थ सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग अपनी बेहतरीन संवाद शैली और मजबूत मीडिया छवि के कारण चर्चा में हैं। इनके अलावा ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड और मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहम के नामों पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि मिलिबैंड का संसद सदस्य न होना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

ब्रिटिश राजनीति के जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर की गिरती अप्रूवल रेटिंग और पीटर मैंडेलसन जैसे विवादों ने लेबर पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग को हवा दे दी है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्या ब्रिटेन एक बार फिर सत्ता परिवर्तन का गवाह बनेगा और क्या शबाना महमूद के रूप में देश को अपनी पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री मिलेगी। फिलहाल लंदन के सियासी गलियारों में इस्तीफों का दौर जारी है और अनिश्चितता का माहौल गहराता जा रहा है।

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