US Strike on Iran: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की आहट के बीच सऊदी अरब की भूमिका ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। 31 जनवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब अब एक ‘दोहरी रणनीति’ पर काम कर रहा है। जहां एक ओर वह सार्वजनिक मंचों पर शांति की बात करता है, वहीं पर्दे के पीछे वह अमेरिका को ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई के लिए उकसा रहा है।
एक्सियोस (Axios) की एक रिपोर्ट ने वाशिंगटन डीसी में हुई एक बेहद गोपनीय बैठक का खुलासा कर सनसनी फैला दी है। इस बैठक में सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान (KBS) ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और व्हाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ लंबी चर्चा की। प्रिंस खालिद ने अमेरिकी प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दी गई अपनी धमकियों पर अमल नहीं किया, तो ईरानी शासन का मनोबल बढ़ेगा और वह क्षेत्र में एक अजेय शक्ति बनकर उभरेगा।
सऊदी अरब का यह कड़ा रुख बेहद चौंकाने वाला है, क्योंकि यह उनके अब तक के आधिकारिक स्टैंड से बिल्कुल उलट है। इससे पहले तक रियाद खुले तौर पर तनाव कम करने की चेतावनी देता रहा था। यहां तक कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने खुद ट्रंप से बातचीत कर ईरान पर हमले को टालने का अनुरोध किया था। लेकिन अब प्रिंस खालिद का यह बयान दर्शाता है कि सऊदी अरब को डर है कि यदि इस बार ईरान को नहीं रोका गया, तो भविष्य में उसे संभालना नामुमकिन होगा।
दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों को करारा जवाब दिया है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के हमले का जवाब ‘बेजोड़ और विनाशकारी’ तरीके से देगा। ईरान ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है और अपनी सुरक्षा तैयारियों को पुख्ता कर लिया है। इस समय पूरा पश्चिमी एशिया एक बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है, जहां सऊदी अरब की यह गुप्त कूटनीति आग में घी डालने का काम कर सकती है।
