अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण पाने के बाद अब अपनी सैन्य शक्ति को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल के जरिए घोषणा की है कि वह साल 2027 के लिए अमेरिकी रक्षा बजट को 1 ट्रिलियन डॉलर से बढ़ाकर सीधा 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने जा रहे हैं। यह बजट इतना विशाल है कि यह भारत की कुल जीडीपी के लगभग 36 प्रतिशत हिस्से के बराबर बैठता है। ट्रंप ने इस भारी बढ़ोतरी को वैश्विक सुरक्षा की नाजुक स्थिति के लिए अनिवार्य बताया है और उनका दावा है कि इस फंड के जरिए वह एक ऐसी “ड्रीम मिलिट्री” तैयार करेंगे जो दुनिया की किसी भी चुनौती को कुचलने में सक्षम होगी।
वेनेजुएला में मिली सफलता के बाद ट्रंप अब पूरी तरह से आक्रामक मोड में नजर आ रहे हैं और उन्होंने ग्रीनलैंड, मेक्सिको, पनामा, कोलंबिया और क्यूबा जैसे देशों को भी सीधे तौर पर चेतावनी देना शुरू कर दिया है। ट्रंप का इरादा इन क्षेत्रों के महत्वपूर्ण मिनरल्स और प्राकृतिक संसाधनों पर अमेरिकी आधिपत्य स्थापित करना है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि रक्षा बजट में यह बढ़ोतरी सीनेट, कांग्रेस और विभिन्न मंत्रालयों के साथ गहन चर्चा के बाद की गई है, क्योंकि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां जोखिमों से भरी हैं और अमेरिका की सुरक्षा ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
इस विशाल सैन्य खर्च को वहन करने के लिए ट्रंप ने अपनी पुरानी टैरिफ नीति को ही मुख्य आधार बनाया है। उन्होंने दावा किया कि यदि दूसरे देशों से टैरिफ के रूप में भारी कमाई नहीं हो रही होती, तो वह रक्षा बजट को 1 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर कभी नहीं ले जाते।
ट्रंप के अनुसार, टैरिफ से होने वाली इस आय ने अब अमेरिका को इस काबिल बना दिया है कि वह न केवल अपनी विशाल सेना को फंड कर सके, बल्कि अपना राष्ट्रीय कर्ज भी कम कर सके और अमेरिकी नागरिकों को वित्तीय फायदे पहुंचा सके। उन्होंने इस मौके पर जो बाइडेन प्रशासन की आर्थिक नीतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछली सरकार के समय ऐसी आर्थिक मजबूती और सैन्य विस्तार की कल्पना करना भी असंभव था।
