नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के तहत नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 23 फरवरी 2026 को कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक जारी कर दी है। इस नई किताब में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को अधिक व्यापक और तथ्यात्मक रूप से पेश करने के लिए कई महत्वपूर्ण अपडेट्स जोड़े गए हैं। ‘इंडियाज लॉन्ग रोड टू इंडिपेंडेंस’ नामक अध्याय में जलियांवाला बाग हत्याकांड और भारत के विभाजन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ऐसे तथ्यों को शामिल किया गया है, जो अब तक की स्कूली किताबों से गायब थे।
जलियांवाला बाग हत्याकांड के संदर्भ में नई किताब में एक चौंकाने वाला सच उजागर किया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि 13 अप्रैल 1919 के उस जघन्य नरसंहार के लिए ब्रिटिश सरकार ने आज तक औपचारिक रूप से माफी नहीं मांगी है। हालांकि ब्रिटिश हुकूमत ने समय-समय पर इसे अपने इतिहास की एक ‘शर्मनाक घटना’ जरूर करार दिया, लेकिन कभी भी आधिकारिक रूप से इसके लिए खेद व्यक्त करते हुए क्षमा याचना नहीं की। किताब यह भी बताती है कि माफी की मांग को लेकर अब तक कई सार्वजनिक और राजनीतिक अनुरोध किए गए, हालांकि भारत सरकार की ओर से कभी ऐसा कोई औपचारिक आग्रह नहीं किया गया।
इसके अलावा, किताब जनरल डायर को लेकर भी कड़ा रुख अपनाती है। इसमें बताया गया है कि हजारों निहत्थे भारतीयों की जान लेने वाले जनरल डायर को ब्रिटिश सरकार ने कभी कोई कानूनी या कठोर सजा नहीं दी। 1920 की हंटर कमीशन रिपोर्ट ने डायर की कार्रवाई को अमानवीय बताया और केवल 379 मौतों का सरकारी आंकड़ा पेश किया, जबकि असल में वहां हजारों लोग मारे गए थे। रिपोर्ट में केवल निंदा करके डायर को छोड़ दिया गया, जो ब्रिटिश न्याय प्रणाली की विफलता को दर्शाता है।
विभाजन और आजादी के कारणों पर भी एनसीईआरटी ने नया नजरिया पेश किया है। नई पुस्तक के अनुसार, आजादी का श्रेय केवल महात्मा गांधी के अहिंसा सिद्धांत और कांग्रेस की नीतियों को ही नहीं दिया जा सकता, बल्कि इसके पीछे कई अन्य कारक भी सक्रिय थे। इनमें क्रांतिकारियों के निरंतर प्रयास, रॉयल इंडियन एयर फोर्स और रॉयल इंडियन नेवी में हुई बगावत, और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन का गिरता प्रभाव प्रमुख थे। विभाजन के मुद्दे पर किताब यह भी स्पष्ट करती है कि मुसलमानों का एक बड़ा हिस्सा बंटवारे के पक्ष में नहीं था, लेकिन अंततः इसे ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता माना गया। ये बदलाव छात्रों को भारत के वास्तविक इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की जटिलताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे।
