Mouni Amavasya 2026: आज के दिन करें स्नान, दान और तर्पण, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत की विधि

Mauni Amavasya 2026: हिंदू धर्म में माघ महीने की इस अमावस्या तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने और भगवान विष्णु के साथ-साथ पितरों की आराधना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

Mauni Amavasya 2026: आज रविवार, 18 जनवरी 2026 को देश भर में मौनी अमावस्या का पावन पर्व श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में माघ महीने की इस अमावस्या तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने और भगवान विष्णु के साथ-साथ पितरों की आराधना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस तिथि को ‘मौनी’ अमावस्या इसलिए कहा जाता है क्योंकि आज के दिन मौन रहकर आत्म-चिंतन और ईश्वर का ध्यान करने का विधान है।

स्नान, दान और तर्पण के शुभ मुहूर्त

शास्त्रों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर शुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। आज सुबह 05:32 बजे से 06:23 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त स्नान के लिए सर्वोत्तम रहा। इसके अलावा दोपहर 12:27 बजे से 01:11 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में पूजा-पाठ और दान करना कल्याणकारी माना गया है। पितरों की शांति के लिए किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए सुबह 11:30 बजे से दोपहर 02:30 बजे तक का समय सबसे उपयुक्त है।

स्नान की विधि और मौन व्रत का महत्व

आज के दिन स्नान की एक विशेष विधि बताई गई है। यदि आप गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान कर रहे हैं, तो तीन बार डुबकी लगाकर सूर्यदेव की ओर मुख करके जल अर्पित करना चाहिए। घर पर स्नान करने वाले जातकों को नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। स्नान के पश्चात कुछ समय के लिए मौन रहने का संकल्प लेना चाहिए। मान्यता है कि वाणी पर संयम रखने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है। शाम के समय दीपदान करके पितरों और भगवान विष्णु की आरती करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।

पौराणिक कथा: सोमा धोबिन और गुणवती का प्रसंग

मौनी अमावस्या की प्रचलित कथा कांचीपुरी के ब्राह्मण देवस्वामी की पुत्री गुणवती से जुड़ी है। गुणवती की कुंडली में वैधव्य (पति की मृत्यु) का दोष था, जिसे दूर करने के लिए उसके पिता ने एक साधु की सलाह पर सिंहल द्वीप की रहने वाली सोमा धोबिन से आशीर्वाद लेने का मार्ग चुना। सोमा एक महान पतिव्रता स्त्री थी। गुणवती की सेवा और भक्ति से प्रसन्न होकर सोमा ने अपने जीवन के पुण्यों का फल उसे दान कर दिया, जिससे विवाह के बाद गुणवती के पति को जीवनदान प्राप्त हुआ। इसी कथा के आधार पर आज भी महिलाएं अपने परिवार के कल्याण और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत श्रद्धापूर्वक रखती हैं।

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