देव दिवाली 2025: जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और दीपक जलाने का सही समय

Dev Diwali 2025 (Wikimedia Commons)
Dev Diwali 2025 (Wikimedia Commons)

Dev Deepawali 2025: हर साल कार्तिक महीने की पूर्णिमा तिथि को देव दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 5 नवंबर, बुधवार को है।

इस दिन शाम के समय भगवान विष्णु (लक्ष्मीनारायण) की पूरे विधि-विधान से पूजा और आरती की जाती है। साथ ही, ख़ास तरह के दीपक जलाए जाते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की ख़ास कृपा मिलती है।

हमेशा शुभ समय (मुहूर्त) में ही पूजा और दीपक जलाने चाहिए, ताकि पूजा का पूरा फल मिल सके। आइए जानते हैं कि देव दिवाली के दिन पूजा का शुभ समय, पूजा का तरीका और दीपक जलाने का सही समय क्या रहेगा।

देव दिवाली 2025 का शुभ मुहूर्त

देव दिवाली के दिन प्रदोष काल में दीपक जलाने का विशेष महत्व है। इस वर्ष 5 नवंबर, बुधवार को शाम 5 बजकर 30 मिनट से लेकर 7 बजकर 40 मिनट तक का समय पूजा और दीपक जलाने के लिए सबसे बढ़िया रहेगा। इस अवधि में आरती, मंत्रजाप और दीपक प्रज्वलित करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

दीपक जलाने का सही समय और विधि

देव दिवाली के दिन शाम को पूजा के बाद दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है। दीपक जलाने का शुभ समय 5:30 बजे से 7:40 बजे तक रहेगा। सात घी के दीपक जलाएं और उन्हें सात अलग-अलग स्थानों पर रखें—जैसे शिव मंदिर, विष्णु मंदिर, पीपल, बेलपत्र और आंवले के वृक्ष के नीचे। घर की चौखट पर भी एक दीपक अवश्य रखें। इससे घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।

देव दिवाली की पूजा विधि

1. सबसे पहले शाम के समय प्रदोष काल में पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।

2. एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर लक्ष्मी-नारायण की तस्वीर स्थापित करें।

3. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की भी पूजा करना शुभ माना जाता है।

4. ‘ॐ नमः शिवाय’, ‘ॐ नमो भगवते रूद्राय’ और ‘ॐ लक्ष्मी नारायणाय नमः’ मंत्रों का 108 बार जाप करें।

5. मंत्रजाप के बाद आरती करें, भोग लगाएं और सात दीपक जलाएं।

दीप जलाने का ख़ास नियम (दीपदान)

1. पूजा के बाद दीपदान ज़रूर करें। इससे घर में सुख-शांति आती है।

2. सात दीपक: घी के सात दीपक और सात फूल ले लें।

3. रसोई में दीप: रसोई में पानी रखने की जगह पर 7 घी के दीपक जलाएँ और सामने फूल रखें।

4. सात जगह दीपदान: अब इन फूल और दीयों को सात अलग-अलग पवित्र जगहों पर रखें, जैसे:

  • शिव मंदिर के पास
  • आंवले के पेड़ के नीचे
  • विष्णुजी के मंदिर के पास
  • बेलपत्र के पेड़ के नीचे
  • पीपल के पेड़ के नीचे।

5. कामना माँगे: दीपक रखते समय मन में अपनी इच्छा ज़रूर बोलें।

6. चौखट पर दीप: इस दिन एक दीपक घर की चौखट पर भी ज़रूर रखना चाहिए।

देव दीपावली का महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का संहार किया था, इसलिए इसे “देवों की दिवाली” कहा जाता है। कहा जाता है कि इस रात देवता स्वयं काशी में उतरते हैं और गंगा घाटों पर दीपदान से संपूर्ण वातावरण दिव्य हो जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और दान-पुण्य करने से अज्ञान, दुःख और पापों का नाश होता है तथा जीवन में समृद्धि आती है।

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