जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ हुई आपत्तिजनक नारेबाजी को लेकर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अलगाववादी विचारधारा पर कड़ा प्रहार करते हुए स्पष्ट किया कि देश की अखंडता के खिलाफ किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की चेतावनी
रायपुर में मीडिया से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री ने जेएनयू की घटना को ‘राष्ट्रविरोधी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग अलगाववादी सोच रखते हैं और देश को तोड़ने की बात करते हैं, अब उनकी “विचारधारा की कब्र खुदेगी”। शर्मा ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ केवल सुरक्षा के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि वैचारिक स्तर पर भी निर्णायक जंग लड़ रही है। उन्होंने बस्तर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विकास और शांति की बहाली ही ऐसी नकारात्मक सोच का सबसे बड़ा जवाब है।
जेएनयू प्रशासन की सख्त कार्रवाई
कैंपस में 5 जनवरी की रात हुई इस घटना के बाद जेएनयू प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है। प्रशासन का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर नफरत फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस शिकायत में मुख्य रूप से छात्र संघ (JNUSU) के चार पदाधिकारियों को नामजद किया गया है:
- अदिति मिश्रा (अध्यक्ष)
- गोपिका बाबू (उपाध्यक्ष)
- सुनील यादव (महासचिव)
- दानिश अली (संयुक्त सचिव)
विवाद का मुख्य कारण
यह पूरा बवाल उस समय शुरू हुआ जब 5 जनवरी की रात जेएनयू छात्र संघ ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था। आरोप है कि इस दौरान उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के बाद छात्रों ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ ‘अमर्यादित’ और ‘भड़काऊ’ नारे लगाए। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और हिंदू सेना जैसे संगठनों ने भी दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
छात्र संघ का पक्ष
दूसरी ओर, जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि लगाए गए नारे ‘वैचारिक’ थे और उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर हमला करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक असहमति दर्ज कराना था। हालांकि, दिल्ली पुलिस अब बीएनएस (BNS) की धाराओं के तहत मामले की कानूनी जांच कर रही है।
