नई दिल्ली: त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय (TSU) की स्थापना हाल ही में संसद के एक अधिनियम के माध्यम से हुई है, जिसे पिछले बजट सत्र 2025 में पारित किया गया था। यह विश्वविद्यालय सहकारी शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। वर्तमान में विश्वविद्यालय में चार पाठ्यक्रम हैं, जिनमें पूर्ववर्ती ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आनंद (IRMA) का एक पाठ्यक्रम और विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद शुरू किए गए तीन नए पाठ्यक्रम शामिल हैं।
विश्वविद्यालय में वर्तमान स्वीकृत वार्षिक प्रवेश क्षमता, जिसमें एक संबद्ध संस्थान भी शामिल है, इस प्रकार है:
- डिप्लोमा कार्यक्रम: 25 सीटें
- स्नातक कार्यक्रम: 30 सीटें
- स्नातकोत्तर कार्यक्रम: 583 सीटें
- डॉक्टरेट कार्यक्रम: 10 सीटें
अपने संचालन के चौथे वर्ष से, विश्वविद्यालय और इसके संबद्ध संस्थानों की संयुक्त वार्षिक प्रवेश क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी:
- स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के लिए: लगभग 9,600 सीटें
- डिप्लोमा कार्यक्रमों के लिए: लगभग 16,000 सीटें
- पीएचडी कार्यक्रमों के लिए: लगभग 60 सीटें
- सर्टिफिकेट कार्यक्रमों के लिए: लगभग 8 लाख सीटें
टीएसयू की स्थापना केवल गुजरात तक ही सीमित नहीं होगी, बल्कि विश्वविद्यालय अपने स्वयं के विद्यालयों और संबद्ध संस्थानों की स्थापना करके पूरे देश में इसका विस्तार करेगा।
सरकार ने टीएसयू के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचे के निर्माण हेतु कॉर्पस फंड के रूप में 500 करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान दिया है। इसकी वित्तपोषण संरचना सरकारी निधि, स्व-वित्तपोषण या अन्य स्रोतों का मिश्रण होगी।
यह जानकारी सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
