अहमदाबाद: भारत और जर्मनी के बीच कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के लिए सोमवार, 12 जनवरी 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के अहमदाबाद में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की अगवानी करेंगे। चांसलर बनने के बाद मर्ज की यह पहली एशिया यात्रा है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत और जर्मनी की रणनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
पीएम मोदी सुबह ही साबरमती आश्रम पहुंच चुके हैं, जहां वे आश्रम की पुनर्विकास परियोजना की समीक्षा करने के बाद सुबह 9:30 बजे जर्मन चांसलर का स्वागत करेंगे। यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा और उच्च तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के नए द्वार खोलने वाली मानी जा रही है।
साबरमती में स्वागत और कार्यक्रम
साबरमती के तट पर होने वाली इस मुलाकात के दौरान दोनों नेता ऐतिहासिक आश्रम का दौरा करेंगे, जहां चांसलर मर्ज महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों से रूबरू होंगे। इसके बाद दोनों नेताओं के अहमदाबाद के प्रसिद्ध ‘काइट फेस्टिवल’ यानी पतंग उत्सव में शामिल होने का कार्यक्रम है, जो गुजरात की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न हिस्सा है। चांसलर मर्ज कौशल विकास से जुड़े एक विशेष कार्यक्रम में भी शिरकत करेंगे, जो दोनों देशों के बीच मानव संसाधन और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अहमदाबाद के दौरों के बाद जर्मन चांसलर बेंगलुरु के लिए रवाना होंगे, जो भारत का प्रमुख तकनीकी केंद्र है।
Welcome to India! Willkommen in Indien!
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) January 12, 2026
Federal Chancellor Friedrich Merz @Bundeskanzler has arrived in Ahmedabad on an official visit. Warmly received by Hon’ble Governor of Gujarat, Shri Acharya Devvrat at the airport.
India and Germany are celebrating 75 years of… pic.twitter.com/Qw4ZkQ0FpP
रक्षा और आर्थिक संबंधों पर जोर
वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर यह मुलाकात और भी अहम हो जाती है। विशेष रूप से यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच, दोनों नेता वैश्विक शांति बहाली की संभावनाओं पर गहन चर्चा करेंगे। जर्मनी वर्तमान में यूरोपीय संघ में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। इस यात्रा का एक सबसे बड़ा आकर्षण 5 बिलियन यूरो का पनडुब्बी सौदा हो सकता है।
जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप और मझगांव डॉक के बीच भारतीय नौसेना के लिए छह आधुनिक स्टील्थ पनडुब्बियों के निर्माण को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है, जिसे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए भारी टैरिफ के बीच भारत अब यूरोप और विशेषकर जर्मनी के साथ अपने आर्थिक सेतु को और अधिक मजबूत करना चाहता है।
ग्रीन हाइड्रोजन और तकनीकी सहयोग
आर्थिक और रक्षा संबंधों के साथ-साथ दोनों देश भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। भारत और जर्मनी के बीच ‘इंडो-जर्मन ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप’ पर तेजी से काम चल रहा है, जो स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 51.23 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
चांसलर मर्ज की इस यात्रा के तुरंत बाद यूरोपीय संघ के अन्य शीर्ष नेताओं का भी भारत आगमन होना है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि बहुप्रतीक्षित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में कोई बड़ी और सकारात्मक घोषणा जल्द ही सुनने को मिल सकती है।
