अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद उनके सबसे करीबी सहयोगी किरण गुजर ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। गुजर ने दावा किया कि विमान हादसे से महज पांच दिन पहले अजित पवार ने उनसे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के विलय को लेकर विस्तार से बात की थी। उनके अनुसार, अजित ‘दादा’ एनसीपी के दोनों धड़ों को फिर से एक करने के लिए पूरी तरह उत्सुक थे और इसके लिए उन्होंने एक पुख्ता रोडमैप भी तैयार कर लिया था। यह प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में थी और अगले कुछ ही दिनों में इसका आधिकारिक ऐलान होने की उम्मीद थी।
किरण गुजर, जो पिछले 40 वर्षों से पवार परिवार और विशेष रूप से अजित पवार के विश्वासपात्र रहे हैं, ने बताया कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों का एक साथ चुनाव लड़ना इसी बड़ी योजना का हिस्सा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर शरद पवार और सुप्रिया सुले के साथ भी सकारात्मक बातचीत चल रही थी। ऐसा संकेत मिल रहा था कि शरद पवार भी परिवार और पार्टी की एकता के इस कदम का समर्थन करने के लिए तैयार थे। अजित पवार का मानना था कि राज्य और बारामती के बेहतर भविष्य के लिए पार्टी का एकजुट होना अनिवार्य है।
अपने पुराने दिनों को याद करते हुए गुजर ने बताया कि शुरुआत में अजित पवार राजनीति में आने को लेकर थोड़े हिचकिचा रहे थे, लेकिन बारामती में युवा नेतृत्व की जरूरत को देखते हुए उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली। गुजर का मानना है कि दादा के जाने के बाद अब यह और भी जरूरी हो गया है कि दोनों गुट एक साथ आएं ताकि उनकी विकासवादी विरासत को आगे बढ़ाया जा सके। इस खुलासे के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या शरद पवार अपने भतीजे के इस अधूरे सपने को पूरा करेंगे।
